पटियाला, 15 नवंबर:
पंजाब सरकार द्वारा हिंद की चादर धन-धन श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की बेजोड़ शहादत के 350वें वर्ष को समर्पित कार्यक्रमों की श्रृंखला तहत आज गांव बहिर साहिब स्थित श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के चरण छुह स्थान गुरुद्वारा साहिब में कीर्तन समारोह आयोजित किए गए।
इस अवसर पर भाई अनूप सिंह, लखविंदर सिंह और गगनदीप सिंह के रागी जत्थों ने गुरबाणी कीर्तन द्वारा संगत को निहाल किया। हैड ग्रंथी महिंदर सिंह ने अरदास की और श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के जीवन, गुरबाणी तथा उनकी शहादत के प्रसंगों का वर्णन किया।
इस पावन दिवस पर हल्का विधायक कुलवंत सिंह बाजीगर और एस.डी.एम. अशोक कुमार समेत बड़ी संख्या में संगत ने गुरु चरणों में नतमस्तक होकर सर्वत्र कल्याण की अरदास की।
विधायक कुलवंत सिंह बाजीगर ने कहा कि हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत किसी एक धर्म या फिरके के लिए नहीं थी, बल्कि पूरी मानवता के मौलिक अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए थी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार गुरु साहिब जी सहित भाई सती दास, भाई मति दास और भाई दियाला जी की शहादत को पूर्ण श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण कर रही है।
उन्होंने बताया कि गुरु साहिब के चरण छुह स्थान पर बने गुरुद्वारा साहिब की सुंदरता और विकास के लिए 50 लाख रुपये की विशेष अनुदान राशि जारी की गई है, जो गुरुद्वारा साहिब के विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी।
विधायक ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा करवाए जा रहे स्मृति कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत पटियाला के गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, माल रोड में 18 नवंबर को शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक महान कीर्तन दरबार आयोजित होगा, और 21 नवंबर को धार्मिक यात्रा के रूप में विशाल नगर कीर्तन पटियाला पहुंचेगा। उन्होंने सभी संगतों से इन पावन कार्यक्रमों में शामिल होने का निवेदन किया।
इस अवसर पर ट्रक यूनियन प्रधान रंजीत सिंह विरक, बीडीपीओ बघेल सिंह, लाभ डरोली, हरदीप सरपंच ठरुआ, सुखविंदर सिंह सरपंच, अर्श डरोली, मख्खन सरपंच, सरनजीत सिंह, दविंदर सिंह कानूनगो, हरदीप सिंह पटवारी, तर्लोचन जैखड़, बाबा बीरा अरनो, गुरदीप सरपंच, प्रीत सिंह, सरपंच सिंह, हैप्पी शेरगढ़, दिलजीत मत्ता समेत विभिन्न नेता, स्कूली विद्यार्थी, स्थानीय प्रबंधक और भारी संख्या में संगत उपस्थित रही।
इस मौके पर अनेक शख्सियतों और सेवा निभाने वालों को सिरोपाओ देकर सम्मानित किया गया तथा गुरु का लंगर भी वितरित किया गया।






