अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़े रहना बेहद ज़रूरी: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह
तकनीकी युग में अपनी विरासत को सही ढंग से संभालना भी एक चुनौती: कुलपति डॉ. जगदीप सिंह
पटियाला, 28 जनवरी 2026: “अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़े रहना बहुत ज़रूरी है। अगर पंजाबी है, तभी पंजाब है और अगर पंजाब है, तभी हम सभी हैं।”
ये विचार स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने पंजाबी विश्वविद्यालय के पंजाबी भाषा विकास विभाग द्वारा आयोजित 37वें पंजाबी भाषा विकास सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में व्यक्त किए।
‘उच्च शिक्षा में माध्यम के रूप में पंजाबी भाषा का उपयोग: समस्याएं और समाधान’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाबीपन की विशिष्ट पहचान को हमें बनाए रखना है। एक अन्य अहम बयान में उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में हमें बौद्धिक विकास को रुकने नहीं देना चाहिए। इस उद्देश्य की प्राप्ति में पुस्तकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर उन्होंने सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर भी प्रकाश डाला और कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों की भलाई के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की सफलता सभी के सहयोग से ही संभव है।
कुलपति डॉ. जगदीप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीकी युग में अपनी विरासत को सही तरीके से संभालकर रखना भी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में विभिन्न प्रकार का डेटा अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है, इसलिए यह हमारा दायित्व है कि पंजाबी भाषा, साहित्य और संस्कृति से संबंधित प्रमाणिक डेटा इंटरनेट के संबंधित स्रोतों पर उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नए युग की इन चुनौतियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। पंजाबी भाषा विकास विभाग द्वारा ज्ञान-विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षा का माध्यम बनाने पर विशेष बल दिया गया है, तब विश्वविद्यालय के इस विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए अमेरिका से आए डॉ. जसबीर सिंह गिल ने पंजाबी भाषा के संदर्भ में साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए पंजाबी भाषा की सुंदरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंजाब को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र का केंद्र बनाए जाने की आवश्यकता है।
डॉ. मलकीत सिंह सैनी ने सम्मेलन के मुख्य भाषण में पंजाबी भाषा में विज्ञान की पढ़ाई करवाने से जुड़ी कठिनाइयों, चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अवधारणाओं के लिए उपयुक्त शब्दावली की कमी के बावजूद पंजाबी भाषा में विज्ञान को पढ़ना और लिखना असंभव नहीं है।
उन्होंने अंग्रेज़ी और रूसी भाषाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार इन भाषाओं ने लैटिन और ग्रीक से शब्दावली उधार लेकर ज्ञान का विस्तार किया है। उन्होंने विभिन्न संस्थानों को इस दिशा में आगे आने के लिए प्रेरित किया।
धन्यवाद ज्ञापन डीन (शैक्षणिक मामले) डॉ. जसविंदर सिंह बराड़ ने प्रस्तुत किया, जबकि उद्घाटन सत्र का संचालन पंजाबी भाषा विकास विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुरसेवक लांबी ने किया।
इस अवसर पर विभाग द्वारा प्रकाशित दो पत्रिकाओं और कुछ पुस्तकों का भी विमोचन किया गया।






