HomePunjab‘आप’ विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा को हाईकोर्ट से बड़ा झटका

‘आप’ विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा को हाईकोर्ट से बड़ा झटका

भगोड़ा घोषित करने का आदेश बरकरार

चंडीगढ़, 28 जनवरी 2026: बलात्कार और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उन्हें भगोड़ा घोषित करने के आदेश को रद्द करने और उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही अदालत ने पठानमाजरा को किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से भी स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया।

मामले के अनुसार, विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा के खिलाफ 1 सितंबर को बलात्कार और धोखाधड़ी के आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के दौरान उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए निचली अदालत का रुख किया, लेकिन अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बावजूद वे अदालत में पेश नहीं हुए। उनकी लगातार गैरहाजिरी को देखते हुए अदालत ने भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की और 20 दिसंबर 2015 को उन्हें इस मामले में भगोड़ा घोषित कर दिया गया।

भगोड़ा घोषित किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए पठानमाजरा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में दलील दी गई कि कानून के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस को गिरफ्तारी के लिए अलग से वारंट लेने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि किसी आरोपी को जांच पूरी होने और चार्जशीट दाखिल होने से पहले भगोड़ा घोषित नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता का कहना था कि चूंकि उनके मामले में न तो जांच पूरी हुई है और न ही चार्जशीट दाखिल की गई है, इसलिए उन्हें भगोड़ा घोषित करना कानून के खिलाफ है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों और परिस्थितियों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी का आचरण स्पष्ट रूप से न्यायिक प्रक्रिया से बचने और अदालत में पेश न होने को दर्शाता है। ऐसे में निचली अदालत द्वारा उन्हें भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई को गलत नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून किसी आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया से बचने की अनुमति नहीं देता, खासकर तब जब उसके खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हों।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। याचिका के खारिज होने से साफ हो गया है कि उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई जारी रहेगी और उन्हें भगोड़ा घोषित करने का आदेश बरकरार रहेगा।

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