चंडीगढ़, 25 जनवरी 2026: गणतंत्र दिवस परेड 2026 के लिए पंजाब सरकार द्वारा तैयार की गई झांकी आध्यात्मिकता, मानव एकता, करुणा और धार्मिक मूल्यों की रक्षा हेतु किए गए निःस्वार्थ बलिदान की भावना को दर्शाने वाला एक अनूठा प्रतीक है। यह झांकी सिख इतिहास और मानवता के उच्च आदर्शों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह झांकी दो हिस्सों में विभाजित है, जिसमें एक ट्रैक्टर और एक ट्रेलर शामिल हैं। ट्रैक्टर वाले भाग में एक हाथ का प्रतीक दर्शाया गया है, जो मानवीय करुणा और मानवतावादी दृष्टिकोण के माध्यम से आध्यात्मिक प्रकाश फैलाने का संदेश देता है। इसी हिस्से में घूमता हुआ “एक ओंकार” (ईश्वर एक है) का प्रतीक तथा “हिंद की चादर” अंकित वस्त्र दिखाया गया है, जो अत्याचार से पीड़ितों की रक्षा के लिए खड़े होने का प्रतीक है।
झांकी के ट्रेलर भाग में रागी सिंह शबद कीर्तन करते हुए दर्शाए गए हैं, जिनके पीछे खंडा साहिब का प्रतीक स्थापित है, जो पूरे वातावरण को दिव्यता और आध्यात्मिकता से भर देता है। यह दृश्य दिल्ली स्थित गुरुद्वारा श्री सीस गंज साहिब की पृष्ठभूमि को दर्शाता है, जहां प्रतिदिन शबद कीर्तन होता है। ट्रेलर के एक ओर गुरुद्वारा श्री सीस गंज साहिब का मॉडल भी सजाया गया है, जो उस पवित्र स्थल का प्रतीक है जहां नौवें सिख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए शहादत दी थी।
झांकी के साइड पैनलों में गुरु साहिब के महान सिख शिष्यों—भाई मती दास जी, जिन्हें जीवित आरे से चीरकर शहीद किया गया, भाई सती दास जी, जिन्हें रुई में लपेटकर जीवित जलाया गया, और भाई दयाला जी, जिन्हें उबलती कड़ाही में डालकर शहीद किया गया—की शहादत को दर्शाया गया है। इन महान बलिदानों ने मानवता के लिए एक अमर उदाहरण स्थापित किया।
यह उल्लेखनीय है कि पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में नौवें सिख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का 350वां शहीदी पर्व 23 नवंबर से 29 नवंबर 2025 तक श्री आनंदपुर साहिब में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया था। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक समागम आयोजित किए गए।
इतिहास में पहली बार राज्य सरकार ने भाई जैता जी स्मारक स्थल पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना रही। धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत 25 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली स्थित गुरुद्वारा श्री सीस गंज साहिब में अरदास के साथ हुई थी। इसके अलावा श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर), तख्त श्री दमदमा साहिब तलवंडी साबो, फरीदकोट और गुरदासपुर से नगर कीर्तन निकाले गए, जो अंततः पवित्र नगर श्री आनंदपुर साहिब पहुंचकर संपन्न हुए। पूरे पंजाब में भी बड़े पैमाने पर नगर कीर्तन और धार्मिक समागम आयोजित किए गए, जिनमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।






