पटियाला, 29 अगस्त: पंजाब के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ को नशा पीड़ितों के इलाज के लिए एकसमान पद्धति अपनाने हेतु पूरे प्रदेश में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि नशा छोड़ने वाले व्यक्ति को, चाहे वह प्रदेश के किसी भी कोने में रहता हो, वही इलाज
मिल सके जो किसी बड़े अस्पताल में दिया जाता है। यह शब्द डॉ. बलबीर सिंह ने आज सरकार की नशाविरोधी मुहिम के तहत सरकारी मेडिकल कॉलेज पटियाला में मेडिकल अफसरों की क्षमता निर्माण ट्रेनिंग (नशा पीड़ितों के इलाज के लिए उन्नत स्तर की ट्रेनिंग) के समापन कार्यक्रम के मौके पर कहे।
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई पंजाब सरकार की पहली प्राथमिकता है। वैज्ञानिक प्रशिक्षण, रियल टाइम निगरानी और नशा छुड़ाने के मूलभूत ढांचे के विस्तार के जरिए, हम इलाज सेवाओं को अधिक सुलभ और मरीज केंद्रित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा मेडिकल अफसरों, काउंसलरों, पुलिसकर्मियों और मनोवैज्ञानिकों को प्रभावशाली, संवेदनशील और प्रोफेशनल देखभाल देने के लिए नवीनतमट्रेनिंग दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत एम्स द्वारा प्रशिक्षित पंजाब के 26 मनोचिकित्सक वैज्ञानिक ज्ञान, व्यावहारिक कौशल और क़ानूनी जागरुकता को कवर करते हुए प्रदेश के विभिन्न जिलों में पाँच दिवसीय प्रशिक्षण प्रोग्राम चला रहे हैं। इसका उद्देश्य मेडिकल अफसरों और सहयोगी स्टाफ की क्षमता को बढ़ाना है, ताकि जमीनी स्तर पर नशीले पदार्थों की समस्या का सही प्रबंधन किया जा सके।
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार ने अमृतसर और कपूरथला में दो मॉडल सेंटर शुरू किए हैं, जहाँ नशा करने वालों को टीकों के इस्तेमाल और नुकसान से रोकने के लिए काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पद्धति प्रदेश में नशा पीड़ितों के इलाज के लिए तरल और ओरल सब्स्टीट्यूशन थैरेपी अपनाने का हिस्सा है।
उन्होंने मेडिकल अफसरों और विशेषज्ञों की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि उनके सामूहिक प्रयास ‘एक स्वस्थ और नशा मुक्त पंजाब’ को सुनिश्चित करेंगे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अनन्या बिरला फाउंडेशन के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, पी.जी.आई. चंडीगढ़, आई.आई.टी. रोपड़ और टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज मुंबई जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा समर्थित यह यूनिट राज्य भर में निर्बाध तकनीकी सहायता और जमीनी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल की तरह कार्य करता है।
इस मौके पर सरकारी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आर.पी.एस. सिबिया, सरकारी राजेंद्र अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट विशाल चोपड़ा, सिविल सर्जन डॉ. जगपालइंदर सिंह, मेडिकल कमिश्नर डॉ. जसविंदर सिंह, डॉ. रजनीश सहित संगरूर, मानसा के मेडिकल अफसर भी उपस्थित थे।






