स्वस्थ मिट्टी और टिकाऊ खेती के लिए जैव उर्वरकों को अपनाएं किसान: डॉ. गर्ग
पीएयू-फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, संगरूर द्वारा गांव बलियां (कट्टू) में किसान प्रशिक्षण शिविर आयोजित
संगरूर, 8 जून 2026: रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग तथा जैव उर्वरकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के दिशा-निर्देशों के तहत फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, संगरूर द्वारा गांव बलियां (कट्टू) में धान और बासमती की पौध पर लगाए जाने वाले जैव उर्वरक टीकों, मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन तथा धान में फॉस्फोरस उर्वरक के अनावश्यक प्रयोग से बचने संबंधी गांव स्तरीय किसान प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में लगभग 70 किसानों ने भाग लिया।
शिविर का नेतृत्व करते हुए वरिष्ठ प्रसार वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार गर्ग ने किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि उर्वरकों के संतुलित उपयोग से न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि फसल उत्पादन और मिट्टी के स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। उन्होंने मौके पर ही मिट्टी के नमूने लेने की विधि की विस्तृत जानकारी दी और स्वयं नमूना लेकर किसानों को व्यावहारिक रूप से समझाया।
डॉ. गर्ग ने किसानों से धान और बासमती में डीएपी उर्वरक के अनावश्यक उपयोग से बचने तथा यूरिया का भी संयमित प्रयोग करने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से धान की रोपाई से पहले यूरिया के 2-3 बैग डालने की प्रथा से बचने की सलाह दी। साथ ही धान में जिंक की कमी को पूरा करने के लिए केवल अनुशंसित मात्रा में ही जिंक का प्रयोग करने की सलाह दी।
जैव उर्वरकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. गर्ग ने कहा कि धान की पौध पर लगाया जाने वाला एजोस्पाइरिलम टीका फसल की पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी के जैविक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने धान की नर्सरी तैयार करने के लिए अनुशंसित उर्वरकों तथा अन्य प्रबंधन संबंधी सिफारिशों की भी विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने धान की पौध में बौनेपन रोग की पहचान और रोकथाम संबंधी सुझाव भी साझा किए तथा किसानों को नर्सरी की नियमित निगरानी करने के लिए प्रेरित किया।
कृषि विकास अधिकारी (एडीओ) धूरी, डॉ. समनदीप सिंह ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने मक्का की खेती, धान की सीधी बुवाई अपनाने तथा जिप्सम पर उपलब्ध सब्सिडी के बारे में भी किसानों को जागरूक किया। साथ ही धान की पौध में बौनेपन रोग की रोकथाम संबंधी अनुशंसाएं भी साझा कीं।
शिविर के सफल आयोजन में प्रगट सिंह, कुलदीप सिंह (सरपंच), जगदीश सिंह (प्रधान, कोऑपरेटिव सोसायटी), लखवीर सिंह, सुखदर्शन सिंह (सेवानिवृत्त पशु चिकित्सा निरीक्षक) तथा अन्य लोगों ने विशेष योगदान दिया। अंत में किसानों को प्रदर्शन के रूप में एजोस्पाइरिलम टीके वितरित किए गए। कृषि साहित्य की बिक्री भी की गई।
शिविर के दौरान किसानों द्वारा पूछे गए विभिन्न कृषि संबंधी प्रश्नों के वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित ढंग से उत्तर दिए गए। किसानों ने मिट्टी परीक्षण करवाने और अनुशंसित उर्वरक प्रबंधन अपनाने में विशेष रुचि दिखाई।
अंत में डॉ. गर्ग और डॉ. समनदीप सिंह ने श्री प्रगट सिंह के खेत में पराली मल्चिंग के साथ उगाई गई हल्दी की फसल का निरीक्षण किया तथा जगदीश सिंह द्वारा उगाई गई हरी खाद हेतु जंतर की फसल का भी दौरा किया।






