चंडीगढ़, 30 मार्च 2026 : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पिछले चार वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में किए गए कार्यों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि नया शैक्षणिक सत्र अप्रैल से शुरू होगा और पाठ्य-पुस्तकें पहले ही सभी स्कूलों में पहुंचा दी गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव किए हैं और सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के बराबर लाने का प्रयास किया है। वर्ष 2026-27 के लिए शिक्षा बजट ₹19,279 करोड़ निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने “शिक्षा क्रांति” के दूसरे चरण की भी घोषणा की, जिसके तहत ₹3,500 करोड़ का विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया है।
उन्होंने बताया कि पंजाब के स्कूलों ने राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण 2024 में बेहतरीन प्रदर्शन किया है और इस मामले में केरल को भी पीछे छोड़ दिया है। इसके अलावा राज्य में 118 “स्कूल ऑफ एमिनेंस” स्थापित किए जा रहे हैं।
परीक्षा प्रणाली पर बोलते हुए भगवंत मान ने कहा कि गुजरात में पेपर लीक की घटनाएं अधिक सामने आती हैं, जबकि पंजाब में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि पहले एक क्षेत्र के सभी छात्र टॉपर घोषित हुए थे, जिसके बाद सरकार ने परीक्षा दोबारा आयोजित करवाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया और अब पंजाब सरकार भी उसी दिशा में काम कर रही है ताकि सरकारी और निजी स्कूलों के बीच का अंतर कम किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षकों को केवल पढ़ाने का कार्य दिया जाएगा और उन पर अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां नहीं डाली जाएंगी।
उन्होंने आगे कहा कि निकट भविष्य में जनगणना होने वाली है और इसके लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अनुरोध किया गया है कि शिक्षकों को इस कार्य में न लगाया जाए। इसके स्थान पर अन्य कर्मचारियों की सेवाएं ली जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि 25 स्कूलों के नाम शहीदों और प्रमुख हस्तियों के नाम पर रखे गए हैं। संगरूर में उनके गांव के स्कूल का नाम जगसीर हवलदार के नाम पर रखा गया है।
विद्यार्थियों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए “बिजनेस ब्लास्टर” योजना शुरू की गई है, जिसके तहत छात्रों ने ऐसे नवाचार विकसित किए हैं जो ₹70 करोड़ तक की आय उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं।






