पटियाला का मॉडल अन्य शहरों में भी लागू किया जाएगा
पटियाला, 19 मार्च,2026 : शहरी वायु गुणवत्ता में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम ने मेयर कुंदन गोगिया, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेयरपर्सन रीना गुप्ता, डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया और नगर निगम कमिश्नर परमजीत सिंह की उपस्थिति में यहां बडूंगर श्मशानघाट में राज्य का पहला वायु प्रदूषण नियंत्रण यंत्र (एपीसीडी) का उद्घाटन किया।
पटियाला में यह यंत्र राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनकैप) के तहत एक पायलट परियोजना के रूप में स्थापित किया गया है। इस पहल को सभी गैर-प्राप्ति (नॉन-अटेनमेंट) शहरों में दोहराया जाएगा और बाद में पूरे पंजाब में लागू किया जाएगा।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेयरपर्सन रीना गुप्ता ने कहा, “वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए ऐसे समाधानों की आवश्यकता है जो वैज्ञानिक रूप से सटीक और सामाजिक रूप से स्वीकार्य हों।” उन्होंने कहा कि पारंपरिक अंतिम संस्कार प्रथाएं हमारे सांस्कृतिक ताने-बाने का अभिन्न हिस्सा हैं और यह पहल दर्शाती है कि तकनीक किस प्रकार परंपराओं के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभा सकती है। उन्होंने कहा कि इस वायु प्रदूषण नियंत्रण यंत्र की स्थापना प्रदूषण को उसके स्रोत पर ही कम करने की दिशा में एक अग्रणी कदम है और बोर्ड सभी के लिए स्वच्छ वायु सुनिश्चित करने हेतु पंजाब के सभी गैर-प्राप्ति शहरों में इस मॉडल को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर मेयर कुंदन गोगिया ने कहा कि यह पहल पंजाब की स्वच्छ वायु रणनीति में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है। डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया ने कहा कि एनकैप के तहत यह पायलट प्रोजेक्ट अन्य शहरों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेगा और साथ ही हमारी परंपराओं का सम्मान करते हुए वायु प्रदूषण में कमी सुनिश्चित करेगा।
नव स्थापित एपीसीडी को कण पदार्थ (पी एम 10 और पी एम 2.5) के उत्सर्जन को उल्लेखनीय रूप से कम करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे शहरी वायु प्रदूषण में एक महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर नजरअंदाज किए जाने वाले योगदान को कम किया जा सकेगा। डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि इस तरह के प्रयास प्रदूषण को उसके स्रोत पर ही नियंत्रित करने की व्यापक रणनीति के अनुरूप हैं, जो प्रभावी वायु गुणवत्ता प्रबंधन और जन स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
इस दौरान पीपीसीबी के सदस्य सचिव डॉ. लवनीत दुबे ने कहा, “श्मशानघाट, भले ही व्यक्तिगत रूप से कम प्रदूषण उत्पन्न करते हों, लेकिन सामूहिक रूप से शहरी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इन स्थानों पर प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित करके हम अपनी स्वच्छ वायु कार्य योजनाओं में एक महत्वपूर्ण कमी को दूर कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि पीपीसीबी योजनाबद्ध विस्तार से पहले इसकी प्रभावशीलता और आवश्यक सुधारों का आकलन करने के लिए एपीसीडी की स्थापना से पहले और बाद का अध्ययन भी कर रहा है।






