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ई-निगम ऐप पर मीटिंग, अब एक क्लिक पर मिलेगी हर प्रोजेक्ट की जानकारी- मेयर, कमिश्नर

पटियाला, 9 मार्च, 2026: शाही शहर पटियाला ने पूरे पंजाब में पहला डिजिटल नगर निगम बनने का गौरव हासिल किया है। स्थानीय सरकार विभाग द्वारा तैयार की गई ‘ई-निगम ऐप’ पर पहली ऑनलाइन मीटिंग सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। गौरतलब है कि 2 मार्च, 2026 को बजट और जनरल हाउस की मीटिंग इसी ऐप के जरिए आयोजित की गई। इस ऐतिहासिक कदम से नगर निगम का पूरा कामकाज अब पेपर-लेस हो गया है, जिससे न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि जनता के पैसे की भी बड़ी बचत होगी। मीटिंग के दौरान हाउस में कोई भी एजेंडा कागज पर नहीं दिया गया और डिजिटल ई-बुक के माध्यम से सारा एजेंडा पढ़ा गया।

गौरतलब है कि ई-निगम सॉफ्टवेयर को नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर, पंजाब द्वारा विकसित और लागू किया गया है। इस संबंध में, सिस्टम के सुचारू संचालन और प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एन.आई.सी. की टीम द्वारा निरंतर प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है।

इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए मेयर कुंदन गोगिया और कमिश्नर परमजीत सिंह ने संयुक्त रूप से बताया कि मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर और सभी 60 वार्डों के पार्षदों की विशेष लॉगिन आईडी बन गई है। साथ ही, सभी संबंधित पक्षों को टैबलेट  भी उपलब्ध करवाए गए हैं। इसके साथ ही पार्षद अब अपने कंप्यूटर के जरिए एजेंडा और कार्यवाही का पूरा विवरण देख सकते हैं।

उन्होंने कहा कि नए नियमों के अनुसार होने वाली हाउस मीटिंग से पहले सभी पार्षदों को इस ऐप को चलाने की पूरी जानकारी और ट्रेनिंग दी गई है। उन्होंने कहा कि नए नियमों के अनुसार होने वाली हाउस मीटिंग से पहले सभी पार्षदों को इस ऐप को चलाने की पूरी जानकारी और ट्रेनिंग दी गई है। ताकि इस प्रणाली के साथ पटियाला को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।

ई-निगम ऐप की मुख्य विशेषताएं (बॉक्स)
उपरोक्त दोनों ने कहा कि अधिकारी अब एक क्लिक के जरिए यह जान सकेंगे कि निगम में कितने प्रस्ताव पेश किए गए, कितने पास हुए और कितने रद्द हुए। स्थानीय निकाय विभाग के स्तर पर भी सभी स्वीकृतियां अब ऑनलाइन ही होंगी, जिससे कार्यों का क्रियान्वयन जल्दी शुरू हो जाएगा।

स्टेशनरी के खर्च में कमी (बॉक्स)
उन्होंने कहा कि इस ऐप को बनाने का मुख्य उद्देश्य स्टेशनरी के खर्च को कम करना और नगर निगम के कार्यों में पारदर्शिता लाना है। निगम में हर साल स्टेशनरी पर लगभग 25 से 30 लाख रुपये खर्च होते थे, जिसमें अब 70% तक की कमी आने की उम्मीद है।

– फोटो
नगर निगम में हाउस मीटिंग के दौरान सभी पार्षद टैबलेट का इस्तेमाल करते हुए

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