बराबरी की कमी के कारण रिश्तों में बढ़ रही है दूरी : डॉ. चरणजीत कौर
पटियाला, 6 मार्च 2026: भाषा विभाग पंजाब की ओर से निदेशक स. जसवंत सिंह जफर के नेतृत्व में आज भाषा भवन में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को समर्पित कार्यक्रम ‘कहो कहानी सखियो’ शीर्षक के अंतर्गत आयोजित किया गया। इस दौरान तीन कहानीकारों ने अपनी कहानियों का पाठ किया और एक कवयित्री ने कविताएं सुनाईं। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. चरणजीत कौर, पूर्व प्रोफेसर, पंजाबी यूनिवर्सिटी ने की, जबकि प्रिं. डॉ. बरिंदर कौर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। भाषा विभाग की संयुक्त निदेशक चंदनदीप कौर ने आए हुए मेहमानों का स्वागत किया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें वक्ताओं के रूप में केवल महिलाओं ने भाग लिया और पूरे कार्यक्रम का संचालन भी महिलाओं द्वारा ही किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत कनाडा से आई कवयित्री राजवीर कौर ने अपनी तीन कविताएं ‘सरबंग इश्क’, ‘घर की रूह’ और ‘ढाब किनारे’ सुनाकर की, जिनमें महिला जीवन के विभिन्न चरणों में उत्पन्न होने वाली मनोदशा का सुंदर चित्रण किया गया। इसके बाद खरड़ (रोपड़) से आई कहानीकार दीप्ति बाबूटा ने अपनी कहानी ‘पीछा रह गया दूर’ के माध्यम से मध्यम वर्गीय परिवारों की आर्थिक कठिनाइयों, सपनों और इच्छाओं को पूरा करने के संघर्ष तथा नई और पुरानी पीढ़ी के बीच चल रही खींचतान को प्रस्तुत किया।
अमृतसर से आई डॉ. सरघी ने अपनी कहानी ‘आफ्टर फोर्टी’ के माध्यम से महिलाओं के प्रति पुरुषों के नजरिए, अस्वस्थ संबंधों के कारण परिवारों के टूटने और कामकाजी महिलाओं के प्रति समाज के दृष्टिकोण को उजागर किया। वहीं होशियारपुर से आई त्रिप्ता के सिंह ने अपनी कहानी ‘फैसला’ के माध्यम से पुत्र मोह में डूबे रूढ़िवादी समाज के कारण महिलाओं के शरीर के साथ होने वाले अत्याचार और पुत्र प्राप्ति के लिए आधुनिक सुविधाओं के दुरुपयोग की मार्मिक तस्वीर पेश की।
मुख्य अतिथि प्रिं. डॉ. बरिंदर कौर (माता सुंदरी यूनिवर्सिटी कॉलेज, मानसा) ने कहा कि प्रकृति ने संसार को समान रूप से बनाया है, लेकिन हमारी संकीर्ण सोच के कारण ही महिला और पुरुष के बीच भेदभाव पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष महिला दिवस पर संयुक्त राष्ट्र के नारे “राइट्स, जस्टिस और एक्शन” को अमल में लाने के लिए महिलाओं को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए सुरक्षित समाज की शुरुआत अपने घरों से करनी होगी और निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर पूरी महिला जाति के लिए संघर्ष करना होगा। उन्होंने महिला लेखिकाओं से अपील की कि वे महिलाओं की समस्याओं, भावनाओं, संवेदनाओं और अधिकारों को दर्शाने वाली रचनाओं का सृजन करें।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. चरणजीत कौर ने कहा कि साहित्य की रचना करने के लिए लेखक को पहले स्वयं उन पात्रों के जीवन को महसूस करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आज प्रस्तुत की गई तीनों कहानियों में महिलाओं की साझा समस्याओं का चित्रण किया गया है। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए एक-दूसरे का सहयोगी होना जरूरी है, न कि ऊंच-नीच का भाव रखना। बराबरी की भावना के अभाव के कारण ही रिश्तों में कड़वाहट पैदा होती है। उन्होंने कहा कि अब पुरुष-महिला संबंधों के पारंपरिक अर्थ बदल चुके हैं और इन्हें आधुनिक संदर्भ में देखने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाबी कहानी के सामने चुनौती है कि वह विश्व स्तर की समस्याओं को भी अपना विषय बनाए।
कार्यक्रम की सफलता के लिए सहायक निदेशक अमरिंदर सिंह, सुखप्रीत कौर, जसप्रीत कौर, राबिया सहित अन्य कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। सहायक निदेशक सुरिंदर कौर ने सभी का धन्यवाद किया। मंच संचालन विश्वजोत कौर ने प्रभावशाली ढंग से किया।
इस अवसर पर पंजाबी यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन भाषाएं डॉ. राजिंदरपाल सिंह बराड़, डॉ. बलदेव सिंह धालीवाल, डॉ. बलवीर कौर पंधेर, गुरमीत पनाग (कनाडा), कमल सेखों, सुखविंदर सेखों, रमनदीप विरक सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।
तस्वीर: भाषा विभाग पंजाब द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हस्तियों को सम्मानित करती हुई संयुक्त निदेशक चंदनदीप कौर और डॉ. बलवीर कौर पंधेर।






