मौड़ मंडी के बाज़ीगरों की चौथी पीढ़ी दिखा रही है करतब
लोहे का सरिया सीने के जोर से मोड़ना, गन्ने के घुलाड़े से निकलना, 15 फुट ऊंची मंज़ी से छलांग आकर्षण का केंद्र
गांवों में खत्म हुआ बाज़ी का रुझान, मेलों में ही रह गई परंपरा – बाज़ीगर केसर सिंह
पटियाला, 24 फरवरी, 2026 : यहां शीश महल में चल रहे पंजाब सखी शक्ति क्राफ्ट मेले में बाज़ीगरों के करतबों ने जहां दर्शकों को अच्छी खुराक खाने और स्वास्थ्य का ध्यान रखने का संदेश दिया, वहीं युवाओं को नशा मुक्ति के प्रति भी जागरूक किया।
उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र की ओर से इस क्राफ्ट मेले में लाए गए मौड़ मंडी के बाज़ीगर केसर सिंह सहित 8 बाज़ीगरों की टीम लगातार दर्शकों का मनोरंजन करते हुए लोगों को बाज़ी की पारंपरिक खेल से जोड़ रही है। मेले के नोडल अधिकारी एडीसी दमनजीत सिंह मान ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि बाज़ीगरों के करतब दर्शकों की अच्छी पसंद बने हुए हैं।
बाज़ीगर केसर सिंह ने बताया कि वह अपनी तीसरी पीढ़ी के बाज़ीगर हैं जो इस खेल से जुड़े हुए हैं, जबकि उनके दो बेटों में से एक जसविंदर सिंह आईटीआई कर रहा है और दूसरा संदीप सिंह दसवीं कक्षा में पढ़ाई करते हुए चौथी पीढ़ी के रूप में बाज़ी दिखा रहा है। उन्होंने अफसोस जताया कि गांवों में बाज़ी का खेल खत्म हो चुका है और अब केवल ऐसे मेलों में ही ये करतब देखने को मिलते हैं, जिससे लगता है कि उनकी पांचवीं पीढ़ी शायद आगे यह खेल जारी न रख सके।
केसर सिंह ने बताया कि उनके साथी बाज़ीगरों में शामिल मनदीप सिंह 15 फुट ऊंची मंज़ी से छलांग लगाते हैं, जबकि वह स्वयं दो लाठियों से बने गन्ने के घुलाड़े में से निकलते हैं। जसविंदर सिंह, पप्पू सिंह और वह स्वयं लोहे के सरिए के 1 फुट 4 इंच के रिंग में से निकलते हैं। वहीं बाज़ीगर जोगिंदर सिंह सीने के जोर से सरिया मोड़ते हैं। इसके अलावा सभी जिम्नास्टिक के करतब भी दिखाते हैं, जिन्हें दर्शकों ने भरपूर सराहना दी।
बाज़ीगर केसर सिंह ने कहा कि वह पंजाब सरकार द्वारा पंजाब सखी शक्ति मेले में अपने करतब दिखाने का अवसर देने के लिए धन्यवाद करते हैं और लोगों को संदेश देते हैं कि अच्छी खुराक खाएं, स्वास्थ्य बनाएं और नशे से दूर रहें।






