भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा सबसे ज़्यादा असर
ह्यूस्टन, 29 जनवरी 2026: टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबोट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य की सभी सरकारी एजेंसियों और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को H-1B वीज़ा याचिकाओं पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए हैं। यह प्रतिबंध मई 2027 तक लागू रहेगा। इस फैसले से सरकारी संस्थानों में विदेशी प्रतिभाओं की भर्ती मुश्किल हो जाएगी और इसका सबसे अधिक असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ने की आशंका है।
मंगलवार को जारी आदेश में कहा गया है कि जब तक टेक्सास वर्कफोर्स कमीशन से लिखित अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक कोई भी राज्य एजेंसी या सार्वजनिक विश्वविद्यालय नई H-1B वीज़ा याचिका दायर नहीं करेगा। संस्थानों को H-1B वीज़ा के इस्तेमाल से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट भी देनी होगी, जिसमें कर्मचारियों की संख्या, पद, मूल देश और वीज़ा की समाप्ति तिथि शामिल होगी।
गवर्नर एबोट ने कहा कि संघीय H-1B वीज़ा कार्यक्रम में कथित दुरुपयोग की हालिया रिपोर्टों और अमेरिकी नौकरियों को अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन भी H-1B वीज़ा कार्यक्रम में बड़े बदलाव कर रहा है।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल 19 सितंबर को कुछ गैर-प्रवासी श्रमिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत उन H-1B याचिकाओं पर रोक लगाई गई थी, जिनमें 1,00,000 डॉलर की फीस अदा नहीं की गई थी। यह शुल्क केवल नए आवेदकों पर लागू होता है और इसमें वित्त वर्ष 2026 की H-1B लॉटरी भी शामिल है।
अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवाओं (USCIS) के अनुसार, हाल के वर्षों में H-1B वीज़ा आवेदनों में करीब 71 प्रतिशत हिस्सेदारी भारतीय नागरिकों की रही है, जबकि चीन दूसरे स्थान पर है। तकनीक, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और अनुसंधान जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बड़ी संख्या में H-1B वीज़ा धारक कार्यरत हैं।
टेक्सास की सार्वजनिक यूनिवर्सिटियां इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और तकनीक के क्षेत्रों में सैकड़ों विदेशी फैकल्टी और शोधकर्ताओं को रोजगार देती हैं, जिनमें बड़ी संख्या भारत से आने वाले पेशेवरों की है। गवर्नर के इस फैसले से इन संस्थानों और हजारों विदेशी कर्मचारियों के भविष्य पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।






