HomePunjabराणा बलाचौरिया हत्याकांड मामला: DGP गौरव यादव की हाईकोर्ट में पेशी

राणा बलाचौरिया हत्याकांड मामला: DGP गौरव यादव की हाईकोर्ट में पेशी

ऑपरेशन ‘प्रहार’ पर अदालत की सख्त टिप्पणियां

चंडीगढ़, 28 जनवरी 2026: मोहाली के राणा बलाचौरिया हत्याकांड मामले को लेकर आज पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव की पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पेशी हुई। इस दौरान स्पेशल DGP (लॉ एंड ऑर्डर), SSP मोहाली, DIG रोपड़ रेंज और एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के प्रमुख भी अदालत में उपस्थित रहे।

सुनवाई के दौरान DGP गौरव यादव ने हाईकोर्ट को बताया कि राज्य में ‘ऑपरेशन प्रहार’ शुरू किया गया है, जिसके तहत अब तक लगभग 3000 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि यह अभियान 2-3 साल पहले क्यों नहीं शुरू किया गया। अदालत ने यह भी कहा कि अक्सर हाईकोर्ट के आदेशों के बाद ही ऐसे ऑपरेशन क्यों शुरू किए जाते हैं। साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अभियान के दौरान किसी भी निर्दोष व्यक्ति को गिरफ्तार न किया जाए।

हाईकोर्ट ने पंजाब में बढ़ते गैंगस्टर नेटवर्क को लेकर भी DGP से कड़े सवाल पूछे। अदालत ने कहा कि रोजाना हत्याएं हो रही हैं, सैकड़ों या हजारों की भीड़ में से दो लोग आते हैं, वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं और पुलिस उन्हें पकड़ तक नहीं पाती। जेल में एक कुख्यात अपराधी के इंटरव्यू को लेकर भी अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई।

DGP पंजाब ने दलील दी कि पंजाब में अपराध की दर अन्य राज्यों की तुलना में कम है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है, इसलिए इसकी तुलना अन्य राज्यों से नहीं की जा सकती। अदालत ने फिरौती के रूप में वसूले जा रहे पैसों को ट्रेस करने को लेकर भी सवाल उठाए और पूछा कि यह पैसा कहां जा रहा है और इसका पूरा नेटवर्क क्या है। कोर्ट ने कहा कि हर रोज करोड़ों रुपये का लेन-देन हो रहा है, इस पर क्या जांच की जा रही है। अदालत ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई।

DGP गौरव यादव ने यह भी बताया कि कई घटनाओं में पाकिस्तान का हाथ सामने आया है। हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर गैंगस्टरों को बढ़ावा देने वाले वीडियो हटाने और उनके URL ब्लॉक करने के भी आदेश दिए। साथ ही, DGP को एक सप्ताह के भीतर नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें यह जानकारी देनी होगी कि कितनी घटनाओं में CCTV, मोबाइल या अन्य कैमरों में शूटर कैद हुए और उन मामलों में कितनी गिरफ्तारियां की गईं।

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