चंडीगढ़, 24 जनवरी 2026: पंजाब पुलिस के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) सुमीर सिंह को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी सीनियरिटी के पुनर्निर्धारण और पदोन्नति से वंचित किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस जगमोहन बंसल की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि सुमीर सिंह की नियुक्ति एक “विशेष मामला” थी और वे अपनी नियुक्ति की शर्तों से इतर कोई अतिरिक्त लाभ नहीं ले सकते।
डीएसपी सुमीर सिंह, जिनकी नियुक्ति पूर्व सैनिक कोटे के तहत हुई थी, ने मांग की थी कि उनकी सैन्य सेवा और आबकारी एवं कर अधिकारी (ईटीओ) के रूप में दी गई सेवाओं को उनकी सीनियरिटी तय करने में जोड़ा जाए। उन्होंने 20 मई 2025 के उस आदेश को भी चुनौती दी थी, जिसके तहत उनसे जूनियर डीएसपी अधिकारियों को पुलिस अधीक्षक (एसपी) पद पर पदोन्नत किया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, वर्ष 2015 में पंजाब लोक सेवा आयोग ने डीएसपी और ईटीओ सहित विभिन्न पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। सुमीर सिंह का चयन पूर्व सैनिक कोटे से हुआ, लेकिन निर्धारित कद से एक इंच कम होने के कारण उन्हें डीएसपी पद नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया और सैन्य सेवा के आधार पर कद में छूट की मांग की।
13 जुलाई 2016 को हाईकोर्ट के निर्देश पर सरकार ने मामले पर विचार किया और 6 जुलाई 2017 को एक इंच की छूट दी गई। हालांकि, अन्य चयनित पूर्व सैनिक डीएसपी उम्मीदवारों द्वारा इसे चुनौती दिए जाने के बाद राज्य सरकार ने यह छूट वापस ले ली। इस बीच, सुमीर सिंह ने 25 मई 2018 को विरोध स्वरूप ईटीओ पद जॉइन कर लिया।
बाद में 9 जनवरी 2020 के कैबिनेट फैसले के आधार पर राज्य सरकार ने 24 जनवरी 2020 को उन्हें डीएसपी नियुक्त किया। सरकार ने इसे “विशेष मामला” बताते हुए पंजाब लोक सेवा आयोग की नियमित भर्ती प्रक्रिया से अलग नियुक्ति दी। 27 जनवरी 2020 को उनका ईटीओ पद से इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सुमीर सिंह की नियुक्ति नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नहीं, बल्कि विशेष परिस्थितियों में की गई थी। उनके नियुक्ति पत्र में स्पष्ट था कि सीनियरिटी पंजाब सिविल सेवाएं (जनरल और कॉमन सर्विस कंडीशंस) नियम, 1994 के अनुसार तय होगी। नियुक्ति पत्र में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि उनकी सैन्य सेवा या ईटीओ के रूप में की गई सेवा को डीएसपी सीनियरिटी में जोड़ा जाएगा।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि 2020 में हुई नियुक्ति के लगभग छह साल बाद सीनियरिटी को चुनौती देना न्यायिक हस्तक्षेप के लिए उपयुक्त नहीं है। अंततः, हाईकोर्ट ने याचिका को “योग्यता से रहित” बताते हुए खारिज कर दिया।






