नई दिल्ली, 20 जनवरी 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सहित अन्य वैश्विक साझेदार देशों को गाज़ा शांति समझौते से जुड़े प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का आमंत्रण दिया है। ट्रंप द्वारा गठित इस बोर्ड को गाज़ा और उसके आसपास के क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता स्थापित करने के उद्देश्य से एक नई अंतरराष्ट्रीय संस्था के रूप में पेश किया जा रहा है।
गौरतलब है कि इज़राइल की दो वर्षों तक चली सैन्य कार्रवाई के कारण गाज़ा पट्टी को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। अब गाज़ा में इज़राइल और हमास के बीच हुए संघर्षविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की अवधारणा को दुनिया के सामने रखा है।
हालांकि, इस पहल को लेकर आलोचनाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ आलोचकों का आरोप है कि ट्रंप इस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के जरिए संयुक्त राष्ट्र के समानांतर एक नई वैश्विक व्यवस्था खड़ी करने की कोशिश कर रहे हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड में स्थायी सदस्यता पाने के लिए सदस्य देशों को गाज़ा के पुनर्निर्माण हेतु तीन वर्षों से अधिक अवधि के लिए 1 अरब डॉलर (लगभग 8,300 करोड़ रुपये) का योगदान देना होगा। जो देश यह राशि देने में असमर्थ होंगे, उन्हें केवल तीन वर्षों की सीमित सदस्यता दी जाएगी।
इस प्रस्ताव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं और अब यह देखना अहम होगा कि भारत समेत अन्य देश इस पहल पर क्या रुख अपनाते हैं।






