चंडीगढ़ 4 दिसंबर 2025: आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के मामले में अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से आज बड़ा झटका लगा है। जस्टिस त्रिभुवन दहिया की अदालत ने मजीठिया की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
हालांकि, अदालत ने जांच एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि मामले की जांच तीन महीनों के भीतर हर हाल में पूरी की जाए।
अदालत ने क्या कहा?
हाईकोर्ट के मुताबिक— मजीठिया पर लगे आर्थिक अपराधों के आरोप गंभीर हैं।
इनके पीछे गहरी साजिश की आशंका है।
ऐसे में मौजूदा चरण में जमानत देना उचित नहीं।
अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी आरोपी को अनिश्चित समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। यदि तीन महीने बाद भी जांच पूरी नहीं होती, तो मजीठिया दोबारा जमानत के लिए अर्जी दाख़िल कर सकते हैं।
गवाहों और सबूतों पर असर का डर
अदालत ने माना कि मजीठिया एक प्रभावशाली राजनीतिक नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। उन्हें अभी रिहा किए जाने पर गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका है, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है।
मामला क्या है?
यह केस 540 करोड़ रुपये से अधिक की कथित बेनामी संपत्ति और विदेशी कंपनियों के जरिए पैसों के लेन-देन से जुड़ा हुआ है।
हाईकोर्ट के फैसले से मजीठिया को बड़ी कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।






