ढाका/नई दिल्ली, 25 नवंबर, 2025 : बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से वापस लाने के लिए दबाव बढ़ा दिया है। ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ के मामले में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद, मोहम्मद यूनुस की नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने एक बार फिर भारत को आधिकारिक पत्र भेजा है।
अंतरिम सरकार में विदेश मामलों के सलाहकार एमडी तौहीद हुसैन ने पुष्टि की कि शेख हसीना के तत्काल प्रत्यर्पण की मांग करते हुए एक ‘डिप्लोमेटिक नोट’ नई दिल्ली भेजा गया है। यह पत्र शुक्रवार, 21 नवंबर को भेजा गया था, जिसे नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन के माध्यम से भारतीय विदेश मंत्रालय को सौंपा गया।
भारत को तीसरी बार पत्र
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ढाका सरकार अब तक तीन बार भारत से शेख हसीना को सौंपने की मांग कर चुकी है। इससे पहले 20 और 27 दिसंबर को भी पत्र भेजे गए थे, लेकिन भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
17 नवंबर को सुनाई गई थी मौत की सजा
बांग्लादेश इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT-BD) ने 17 नवंबर को आए फैसले में शेख हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराया था। दोनों को मौत की सजा सुनाई गई। यह फैसला उनकी गैरहाजिरी में आया। वहीं तीसरे आरोपी और पूर्व IGP अब्दुल्ला अल-ममून को पांच साल की जेल हुई और वह सरकारी गवाह बन चुके हैं।
हसीना के बनाए कोर्ट ने ही सुनाया फैसला
दिलचस्प बात यह है कि जिस इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने हसीना को दोषी ठहराया, उसकी स्थापना 2010 में स्वयं शेख हसीना ने 1971 के युद्ध अपराधों की जांच के लिए की थी। आज उसी कोर्ट ने उन्हें ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ का मास्टरमाइंड माना है।
क्यों छोड़ना पड़ा था देश?
अगस्त 2024 में बांग्लादेश में छात्र आंदोलन इतना तेज हुआ कि भारी आगजनी और हिंसा फैल गई। हालात बिगड़ने पर शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया और देश छोड़कर भारत में शरण ले ली। अब अंतरिम सरकार उन्हें वापस लाकर सजा लागू करना चाहती है।
शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर भारत की प्रतिक्रिया क्या होगी, इस पर पूरे दक्षिण एशिया की नजरें टिकी हैं।






