नई दिल्ली, 22 नवंबर 2025:
10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए फिदायीन हमले की जांच में खुफिया एजेंसियों को बेहद चौंकाने वाले सुराग मिले हैं। जांच के दौरान एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क, मल्टी-लेयर हैंडलर चेन और एक साथ कई जगहों पर धमाके करने की साजिश का खुलासा हुआ है। इस हमले में 17 लोगों की मौत हुई थी, जबकि फिदायीन हमलावर डॉ. उमर नबी मारा गया था। वहीं, एनआईए (NIA) अब तक चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
5 लाख में खरीदी गई AK-47 राइफल
जांच में पता चला है कि फरीदाबाद से गिरफ्तार आरोपी डॉ. मुज़म्मिल शकील गणई ने करीब 5 लाख रुपए में AK-47 राइफल खरीदी थी। यह हथियार बाद में आरोपी डॉ. आदिल अहमद राठर के लॉकर से बरामद हुआ। एजेंसियों के अनुसार, इतनी महंगी खरीद से मॉड्यूल की मजबूत फंडिंग और उनकी तैयारियों का स्तर साफ झलकता है।
हर आतंकी का अलग हैंडलर
यह पूरा मॉड्यूल ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकवादियों का था जिसके तार कई दिशाओं में फैले हुए थे। हर आरोपी का एक अलग हैंडलर था। डॉ. मुज़म्मिल और फिदायीन उमर, दोनों अलग-अलग लोगों को रिपोर्ट करते थे। जांच में मंसूर और हाशिम नाम के दो बड़े हैंडलरों का भी पता चला है, जो एक वरिष्ठ हैंडलर के अंडर काम करते थे।
तुर्की और TTP से जुड़ाव
एजेंसियों ने पुष्टि की है कि 2022 में मुज़म्मिल, आदिल और मुज़फ्फर अहमद तुर्की गए थे। उन्हें वहाँ ओकासा नाम के एक व्यक्ति के निर्देश पर भेजा गया था, जिसका संबंध तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से है। योजना के मुताबिक उन्हें तुर्की से अफगानिस्तान भेजा जाना था, लेकिन एक हफ्ते बाद हैंडलर ने अपना फैसला बदल लिया।
‘डीप फ्रीज़र’ से बनाया जा रहा था बम
फिदायीन उमर ने बम बनाने के लिए ऑनलाइन वीडियो और मैन्युअल का सहारा लिया। उसने नूंह से केमिकल और भागीरथ पैलेस से इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदा। हैरान करने वाली बात यह है कि उसने विस्फोटक मिश्रण को स्थिर रखने के लिए एक डीप फ्रीज़र भी खरीदा था।
पैसों के विवाद के बाद बदला प्लान
जांच में पता चला कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पैसों को लेकर मुज़म्मिल और उमर के बीच गंभीर झगड़ा हुआ था। विवाद के बाद उमर ने अपनी लाल रंग की ईको स्पोर्ट कार, जिसमें पहले से विस्फोटक रखे थे, मुज़म्मिल को सौंप दी। एजेंसियों का कहना है कि आतंकियों का प्लान विभिन्न जगहों पर विस्फोटक छिपाकर एक साथ कई हमले करने का था।
हाईकोर्ट ने नहीं दी वकील से मिलने की इजाजत
इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सह-आरोपी जसीर बिलाल वानी को NIA मुख्यालय में अपने वकील से मिलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। वानी फिलहाल एनआईए की कस्टडी में है।
यह पूरी जांच आतंकियों के नेटवर्क, उनकी अंतरराष्ट्रीय पकड़ और किसी बड़े हमले की गहरी साजिश की ओर संकेत करती है।






