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ढाका की अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों में दी मौत की सज़ा, बांग्लादेश में हिंसा भड़की

नई दिल्ली/ढाका, 17 नवंबर, 2025:

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में मौत की सज़ा सुनाई है। तीन जजों की विशेष पीठ ने जुलाई–अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान अत्याचार, हत्याएं और दमनकारी कार्रवाइयों के आदेश देने का दोषी ठहराया है।

भारत में निर्वासन, अदालत में ‘भगोड़ा’ घोषित

78 वर्षीय हसीना अगस्त 2024 में सरकार गिरने के बाद नई दिल्ली आ गई थीं और वहीं निर्वासित जीवन बिता रही हैं। मुकदमा उनकी अनुपस्थिति में चला और उन्हें आधिकारिक रूप से फरार/भगोड़ा घोषित किया गया। 

पूर्व गृह मंत्री और पुलिस प्रमुख भी दोषी

ट्रिब्यूनल ने हसीना के साथ दो शीर्ष अधिकारियों को भी दोषी करार दिया है—

  1. असदुज्जामान खान कमाल, पूर्व गृह मंत्री
  2. चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक

कमाल के भी भारत में होने की संभावना है, जबकि मामून एकमात्र आरोपी हैं जो इस समय हिरासत में हैं और सरकारी गवाह बन चुके हैं।

छात्रों को मारने का आदेश दिया गया”— न्यायालय

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुलाम मुर्तजा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शेख हसीना ने जुलाई–अगस्त 2024 के विरोध प्रदर्शनों में *प्रदर्शनकारी छात्रों पर ड्रोन, हेलीकॉप्टर और घातक हथियारों के इस्तेमाल* का आदेश दिया। अदालत के अनुसार यह कृत्य मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आता है।

5 गंभीर आरोपों में दोषी

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, 8,747 पन्नों की चार्जशीट के आधार पर हसीना और उनके सहयोगियों को सभी पांच आरोपों में दोषी पाया गया, जिनमें शामिल हैं—

* 14 जुलाई 2024 को छात्रों पर बड़े स्तर पर हमले और हत्याएं

* विरोधकारियों पर हवाई हमले का आदेश

* छात्र कार्यकर्ता अबू सईद की हत्या

* अशुलिया में 6 लोगों की हत्या व सबूत मिटाने हेतु पाँच शव जलाना

* चंखारपुल क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों की हत्या

अभियोजन पक्ष का दावा है कि इन घटनाओं में 1,400 से अधिक लोग मारे गए।

बांग्लादेश में हड़ताल और हिंसा तेज़

फैसले से पहले ही अवामी लीग ने रविवार और सोमवार को देशव्यापी बंद का आह्वान किया था। फैसला आते ही ढाका और अन्य शहरों में बम धमाकों, आगजनी और हिंसा की खबरें सामने आई हैं। अदालत परिसर और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है।

इस ऐतिहासिक फैसले ने बांग्लादेश की राजनीति को नए संकट में धकेल दिया है, जबकि देश में तनाव लगातार बढ़ रहा है।

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