नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने बच्चों की टिकटिंग व्यवस्था को और अधिक स्पष्ट और सरल बनाते हुए बड़े बदलाव किए हैं। अब पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे ट्रेन में बिना टिकट यात्रा कर सकेंगे, बशर्ते उनके लिए अलग से सीट या बर्थ आरक्षित न कराई जाए। यदि माता-पिता बच्चे के लिए अलग सीट या बर्थ चाहते हैं, तो उन्हें पूरा वयस्क किराया देना होगा।
पहले यात्रियों में इस बात को लेकर भ्रम रहता था कि बच्चों का आधा किराया कब देना होता है और “नो सीट/नो बर्थ (NOSB)” विकल्प का सही मतलब क्या है। रेलवे ने नए दिशानिर्देशों के तहत इन सभी नियमों को स्पष्ट कर दिया है।
रेलवे के मुताबिक—
* 5 साल से कम उम्र: बिना टिकट यात्रा की सुविधा, लेकिन सीट/बर्थ नहीं मिलेगी।
* 5 से 12 साल तक के बच्चे:
* NOSB विकल्प चुनने पर आधा किराया देना होगा।
* सीट या बर्थ लेने पर पूरा वयस्क किराया देना पड़ेगा।
* 12 वर्ष या उससे अधिक: पूरी तरह वयस्क श्रेणी मानी जाएगी और सामान्य किराया लागू होगा।
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि टिकट बुक करते समय बच्चे की सही उम्र दर्ज करना अनिवार्य है। गलत आयु दर्ज करने पर टिकट अमान्य माना जा सकता है। साथ ही यात्रा के दौरान बच्चे का आयु प्रमाणपत्र या आधार कार्ड साथ रखना जरूरी होगा।
यात्रा को सुरक्षित और सहज बनाने के लिए रेलवे ने माता-पिता को सलाह दी है कि वे बच्चों के लिए आवश्यक दवाएं, पानी और हल्का भोजन साथ रखें। अधिकारियों के मुताबिक, नए नियम यात्रियों को पारदर्शिता देने और टिकटिंग प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए हैं।
इस कदम से यात्रियों को बच्चों के किराए और सीट संबंधी नियमों की स्पष्ट जानकारी मिलेगी, जिससे टिकट बुकिंग के समय होने वाली परेशानियां कम होंगी।






