चंडीगढ़, 5 नवंबर, 2025 — पंजाब यूनिवर्सिटी (Panjab University) की 59 साल पुरानी सीनेट और सिंडिकेट को भंग करने के मामले में आज (बुधवार) को बड़ा मोड़ आया है। केंद्र सरकार (Central Government) ने अपना वह विवादित नोटिफिकेशन वापस ले लिया, जिसके जरिए इन दोनों शीर्ष संस्थाओं को भंग (dissolve) किया गया था।
यह फैसला ठीक उसी दिन आया है, जब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (CM Bhagwant Mann) ने सुबह ही केंद्र के इस निर्णय को “गैर-संवैधानिक” बताते हुए हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी थी।
सुबह दी थी कानूनी लड़ाई की चेतावनी:
मुख्यमंत्री मान ने आज सुबह एक ट्वीट कर कहा था कि पंजाब सरकार केंद्र के “धक्केशाही वाले फैसले” के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोलेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि इस मामले को मजबूती से उठाने के लिए वकीलों का एक बड़ा पैनल गठित किया गया है।
1 नवंबर को जारी हुआ था विवादित आदेश:
केंद्र ने 1 नवंबर (Punjab Day) को एक नोटिफिकेशन जारी कर पंजाब यूनिवर्सिटी की 59 साल पुरानी सीनेट और सिंडिकेट (जो विश्वविद्यालय के सर्वोच्च निकाय हैं) को भंग कर दिया था।
इस फैसले का पंजाब में व्यापक विरोध हुआ था। अकाली दल (SAD), आम आदमी पार्टी (AAP) और कई छात्र संगठनों ने इसे यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता और पंजाब के अधिकारों पर हमला बताया था।
केंद्र का यह कदम वापस लिए जाने के बाद अब विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और पंजाब के अधिकारों को लेकर चल रहा यह राजनीतिक टकराव फिलहाल थम गया है।






