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रूस में लुधियाना के युवक की मौत: धोखे से रूसी सेना में भर्ती किया गया था 21 वर्षीय समरजीत, आज होगा अंतिम संस्कार

लुधियाना 14 मार्च 2026: : पंजाब के लुधियाना जिले के लिए एक अत्यंत हृदयविदारक खबर सामने आई है। बेहतर भविष्य और करियर बनाने के सपने लेकर रूस गए 21 वर्षीय युवक समरजीत सिंह की वहां मौत हो गई है। समरजीत अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था, जिसका पार्थिव शरीर गुरुवार को दिल्ली एयरपोर्ट पहुँचा और वहां से लुधियाना लाया गया। आज शनिवार, 14 मार्च 2026 को लुधियाना के डाबा स्थित श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस घटना ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है और विदेशी एजेंटों द्वारा युवाओं को धोखे से युद्ध में झोंकने के काले सच को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
परिजनों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, समरजीत जुलाई में रूस गया था, लेकिन वहां उसे जबरन रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया। उसके पिता चरनजीत सिंह ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान जब समरजीत को सेना की वर्दी दी गई, तो उसने सवाल उठाया था। उस समय उसे यह कहकर गुमराह किया गया कि उसे आर्मी डॉक्टर के साथ सहायक के रूप में काम करना है, इसलिए वर्दी पहनना अनिवार्य है। हालांकि, जल्द ही उसे अहसास हो गया कि उसके साथ धोखा हुआ है और उसे सीधे युद्ध के मोर्चे पर तैनात किया जा रहा है। समरजीत की पहचान उसके पास मिले रूसी सेना के आधिकारिक टोकन से हुई है।
परिवार के साथ समरजीत का अंतिम संपर्क 8 सितंबर को एक वीडियो कॉल के जरिए हुआ था। वह कॉल मात्र 22 सेकंड की थी, जिसमें से केवल 7 सेकंड ही बात हो पाई। उस आखिरी बातचीत में समरजीत ने भावुक होते हुए कहा था, “मैं ठीक हूँ, पापा आप और मम्मी अपना ख्याल रखना।” इसके बाद से परिवार लगातार उससे संपर्क करने की कोशिश करता रहा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। लगभग एक सप्ताह पहले परिवार को रूसी भाषा में एक पत्र मिला, जिसमें उसकी मृत्यु की सूचना दी गई थी। बाद में भेजे गए डेथ सर्टिफिकेट में उसकी मौत का समय दिसंबर दर्ज है, जबकि परिवार का दावा है कि सितंबर के बाद से ही उसका कोई पता नहीं था।
इस घटना ने एक बार फिर उन भारतीय युवाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन्हें ऊंचे वेतन और सुनहरे भविष्य का लालच देकर विदेशों में युद्ध का हिस्सा बना दिया जाता है। समरजीत के पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जिन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा तिरंगे या कफन में वापस आएगा। फिलहाल, प्रशासन और स्थानीय लोग परिवार को ढांढस बंधाने पहुँच रहे हैं।
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