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ईरान-इजरायल तनाव से वैश्विक ऊर्जा संकट: भारत में ₹15 तक महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल

नई दिल्ली, 20 मार्च 2026: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर ईरान के हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। 19 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 30% तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ने की आशंका है। युद्ध की शुरुआत के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेजी के कारण भारत के लिए “इंडियन बास्केट” की औसत कीमत लगभग $146 प्रति बैरल के चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी $73 से उछलकर $114 प्रति बैरल के पार हो गया है। चूंकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85% और गैस का 50% से अधिक हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में यह अस्थिरता देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर सीधा प्रहार करने वाली है।

विशेषज्ञਾਂ का अनुमान है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इन्हीं स्तरों पर बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹10 से ₹15 प्रति लीटर तक का इजाफा हो सकता है। वर्तमान में सरकारी तेल कंपनियां अपने मार्जिन को कम करके कीमतों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन इस स्थिति को लंबे समय तक खींचना चुनौतीपूर्ण होगा। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बयान दिया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल मजबूत है, लेकिन यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कीमतों में वृद्धि को रोकना मुश्किल हो सकता है। केवल तेल ही नहीं, प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी रिकॉर्ड तेजी देखी गई है; यूरोप में डच टीटीएफ गैस बेंचमार्क 70 यूरो तक पहुंच गया है, जो जनवरी 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है।

इस संकट का एक मुख्य कारण ईरानी ड्रोन हमलों द्वारा कतर के ‘रास लाफान एलएनजी हब’ को पहुंचाया गया नुकसान है, जो दुनिया का सबसे बड़ा गैस निर्यात केंद्र है और वैश्विक एलएनजी आपूर्ति का 20% हिस्सा कवर करता है। इसके अतिरिक्त, भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लेकर है, जहाँ से भारत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी गुजरती है। मौजूदा तनाव ने इस समुद्री मार्ग को असुरक्षित बना दिया है, जिससे सप्लाई चेन बाधित हो रही है। कच्चे तेल की इन बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह प्लास्टिक, पेंट, उर्वरक और दवाओं के निर्माण लागत को भी बढ़ाएगा। साथ ही, डीजल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिसके परिणामस्वरूप फल, सब्जियां और अनाज जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, जिससे आम जनता पर महंगाई की दोहरी मार पड़ना तय है।

 

 

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