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पंजाब में स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई रफ्तार, बजट 2000 करोड़ तक बढ़ा: मुख्यमंत्री भगवंत मान

चंडीगढ़, 20 मार्च 2026: भगवंत मान ने आज अपनी सरकार के चार वर्षों के कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य विभाग में हासिल की गई बड़ी उपलब्धियों का विस्तृत विवरण साझा किया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को हर नागरिक तक पहुंचाने के लिए बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2025-26 के 1200 करोड़ रुपये के बजट को बढ़ाकर 2026-27 के लिए 2000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक 25 लाख परिवारों ने हेल्थ कार्ड के माध्यम से पंजीकरण कराया है, जिनमें से 1.60 लाख लोगों ने 10 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का लाभ उठाया है। उन्होंने आयुष्मान योजना की सख्त शर्तों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंजाब सरकार ने बिना जटिल शर्तों के 3 करोड़ लोगों के लिए 2000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।

आम आदमी क्लीनिकों का विस्तार

राज्य में जल्द ही 100 नए आम आदमी क्लीनिक खोले जाएंगे, जिससे इनकी कुल संख्या 983 हो जाएगी, जबकि 400 अन्य क्लीनिक निर्माणाधीन हैं। इन क्लीनिकों में 47 प्रकार के टेस्ट और 107 तरह की दवाइयां मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, 94 प्रतिशत मरीजों ने इन सेवाओं पर संतोष जताया है और ओपीडी का आंकड़ा 5 करोड़ को पार कर चुका है।

इसके अलावा, 30 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं की जांच और 11 हजार से अधिक मरीजों को डायलिसिस जैसी सुविधाएं प्रदान की जा चुकी हैं।

स्वास्थ्य ढांचे को किया जा रहा मजबूत

स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने पिछले चार वर्षों में 35 प्रतिशत नई भर्तियां की हैं। इसमें डॉक्टरों के साथ-साथ 300 नर्सों और 250 फार्मासिस्टों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। अस्पतालों के लिए 400 करोड़ रुपये की नई मशीनरी खरीदी गई है और 22 नए आईसीयू बनाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि नवंबर तक 9 नए ब्लॉक तैयार हो जाएंगे और 2026 तक अमृतसर, फरीदकोट और मोहाली में पीईटी स्कैन (PET Scan) की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। कैंसर स्क्रीनिंग के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मशीनों और हृदय रोगों के महंगे इंजेक्शनों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। साथ ही, पंजाब में पहली बार सरकारी स्तर पर लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा भी शुरू की गई है।

दवाइयों को लेकर सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि किसी सरकारी अस्पताल में दवाइयां उपलब्ध नहीं होती हैं, तो संबंधित एसएमओ (SMO) की जिम्मेदारी होगी कि वह दवाइयां खरीदकर मरीज को उपलब्ध कराए। यदि मरीज को बाहर से दवा खरीदनी पड़ी, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

राजस्थान से रॉयल्टी का मुद्दा भी उठा

अंत में राजस्थान से पानी की रॉयल्टी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि “जिसने चोरी की हो, वह खुद स्वीकार नहीं करता,” इसलिए पंजाब सरकार इस मामले को अदालत में लेकर जाएगी।

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