बगदाद, 12 मार्च 2026: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इराक के पास एक तेल टैंकर पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि अन्य भारतीय क्रू सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
भारतीय दूतावास, बगदाद ने पुष्टि की है कि अमेरिका के स्वामित्व वाला कच्चे तेल का टैंकर सेफसी विष्णु, जो मार्शल द्वीपसमूह के झंडे के तहत चल रहा था, इराक के बसरा के पास हमले का शिकार हुआ। इस हमले में एक भारतीय चालक दल के सदस्य की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई।
भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि जहाज पर मौजूद बाकी 15 भारतीय क्रू सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। दूतावास लगातार इराकी अधिकारियों और बचाए गए भारतीय नाविकों के संपर्क में है और हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया में जारी संकट 13वें दिन में प्रवेश कर चुका है। क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के कारण गुरुवार को इराक के तेल बंदरगाहों पर संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। General Company for Ports of Iraq के महानिदेशक फरहान अल-फर्तूसी ने बताया कि तेल बंदरगाहों का संचालन रोक दिया गया है, हालांकि वाणिज्यिक बंदरगाह सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
बताया गया कि पेट्रोलियम उत्पादों से भरे एक टैंकर को लोडिंग के दौरान शिप-टू-शिप ट्रांसफर क्षेत्र में विस्फोट से नुकसान पहुंचा। इस घटना में बचाव दलों ने 38 लोगों को सुरक्षित निकाला, जिनमें एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई।
इस बीच भारतीय सरकार ने कहा है कि वर्तमान में फारस की खाड़ी क्षेत्र में 28 भारतीय झंडे वाले जहाज संचालन में हैं। इनमें से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में 677 भारतीय नाविकों के साथ हैं, जबकि 4 जहाज पूर्व में 101 भारतीय नाविकों के साथ मौजूद हैं। उनकी सुरक्षा पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि इस संघर्ष में भारतीय नागरिकों सहित कई लोगों की जान जा चुकी है और हमलों की तीव्रता लगातार बढ़ रही है।
वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी सेना ने रणनीतिक होर्मुज़ जलडमरूमध्य में संभावित खदान बिछाने की कोशिशों को रोकने के लिए ईरानी जहाजों को नष्ट करने के विकल्पों पर भी चर्चा की है।
क्षेत्र में बढ़ते हमलों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।






