नई दिल्ली, 4 मार्च 2026: अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बीच बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे और दिन के अंत में भारी नुकसान के साथ बंद हुए।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का NIFTY 50 385.20 अंक यानी 1.55 फीसदी गिरकर 24,480.50 पर बंद हुआ। सूचकांक 24,388.80 पर खुला और सत्र के दौरान 24,602.45 के उच्च स्तर तक पहुंचा, लेकिन बाद में फिसलकर 24,305.40 के निचले स्तर तक चला गया।
वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का BSE SENSEX 1,122.66 अंक यानी 1.40 फीसदी की गिरावट के साथ 79,116.19 पर बंद हुआ। पिछले सत्र में सेंसेक्स 80,238.85 पर बंद हुआ था। बुधवार को यह 78,528.82 पर खुला, 79,527.41 के उच्च स्तर तक गया और 78,443.20 के निचले स्तर तक फिसला।
एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव रिसर्च प्रमुख सुदीप शाह के अनुसार, निफ्टी लगभग 500 अंकों की गिरावट के साथ गैप-डाउन खुला। उन्होंने कहा कि दैनिक चार्ट पर 24,570-24,600 का महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन टूट चुका है, जो पहले दो बार मजबूत खरीदारी का क्षेत्र रहा था। आरएसआई 30 के आसपास है, जो मंदी के रुझान का संकेत देता है, जबकि डीआई लाइनों का फैलाव बिकवालों के दबदबे को दर्शाता है।
सेक्टोरल मोर्चे पर NIFTY IT 0.11 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ एकमात्र बढ़त वाला सूचकांक रहा। रुपये के 92 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने से आईटी शेयरों को कुछ समर्थन मिला।
दूसरी ओर, NIFTY Metal सबसे बड़ा सेक्टोरल नुकसान उठाने वाला रहा, जबकि NIFTY PSU Bank में लगातार गिरावट का रुख जारी रहा।
निफ्टी पैक में कोल इंडिया और भारती एयरटेल शीर्ष बढ़त वाले शेयर रहे, जबकि टाटा स्टील और टीएमपीवी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी कमजोर खुले और पहले सत्र में गिरावट बढ़ी। हालांकि बाद में कुछ रिकवरी हुई, लेकिन दोनों सूचकांक 2 फीसदी से अधिक गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे वे प्रमुख सूचकांकों से भी कमजोर प्रदर्शन करते दिखे।
निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24,350-24,300 के दायरे में है। यदि यह स्तर टूटता है तो सूचकांक 24,100 और फिर 23,800 तक जा सकता है। ऊपर की ओर 24,650-24,700 का स्तर तत्काल प्रतिरोध रहेगा।
वहीं, Bank Nifty 1.81 फीसदी गिरकर 58,755 पर बंद हुआ। यह अब अपने 100-दिवसीय ईएमए से नीचे फिसल चुका है। बैंक निफ्टी के लिए 58,200-58,100 का दायरा अहम सपोर्ट है, जबकि 59,200-59,300 का स्तर प्रतिरोध के रूप में काम कर सकता है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की सतर्कता के चलते निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।






