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पंजाब सखी शक्ति क्राफ्ट मेले में ‘सिख साम्राज्य 1710-1849’ पर लगी प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

पंजाब राज्य पुरालेख विभाग के सहयोग से पंजाब डिजिटल लाइब्रेरी का अहम प्रयास

मूल दस्तावेज, ऐतिहासिक कलाकृतियां, तस्वीरें और बेशकीमती पांडुलिपियां प्रदर्शित

पंजाब राज्य पुरालेख विभाग ने 20 साल बाद लगाई प्रदर्शनी

महाराजा दलीप सिंह के आखिरी पत्र, खालसा दरबार, 1857 का पंजाब गजट और अन्य बेशकीमती दस्तावेज देखने के लिए रखे गए

पटियाला, 23 फरवरी, 2026: यहां शीश महल में चल रहे पंजाब सखी शक्ति क्राफ्ट मेले में पंजाब डिजिटल लाइब्रेरी द्वारा पंजाब राज्य पुरालेख विभाग के सहयोग से लगाई गई ‘द सिख साम्राज्य (1710-1849): अंतरराष्ट्रीय कलाकारों और लेखकों का दृष्टिकोण’ प्रदर्शनी ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया है।

शीश महल में स्थित बनासर घर में लगाई गई यह पंजाब डिजिटल लाइब्रेरी की 14वीं प्रदर्शनी है। जबकि पंजाब राज्य पुरालेख विभाग ने भी करीब 20 वर्षों बाद ऐसी प्रदर्शनी लगाई है, जहां खालसा दरबार के महत्वपूर्ण दस्तावेजों सहित महाराजा दलीप सिंह की दोबारा सिख बनने की इच्छा जताने वाली चिट्ठी, पंजाब का 1857 का गजट और अन्य बेशकीमती दस्तावेज प्रदर्शित किए गए हैं।

इस प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में इस मेले में ऐसी प्रदर्शनी लगाने का यह अहम प्रयास अपनी अगली पीढ़ी को अपने समृद्ध विरसे और इतिहास से परिचित करवाने के लिए किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रदर्शनी विद्वानों, विद्यार्थियों, इतिहासकारों, कलाकारों और आम लोगों के लिए बहुत लाभकारी साबित होगी।

वित्त मंत्री चीमा ने अफसोस जताया कि पिछली सरकारों ने इस विरसे को लोगों तक पहुंचाने और इसे संभालने का कोई प्रयास नहीं किया। उन्होंने पटियाला के डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया और ए.डी.सी. दमनजीत सिंह मान की सराहना करते हुए इस मेले की सफलता की कामना की।

इस दौरान पंजाब राज्य पुरालेख विभाग, चंडीगढ़ और पटियाला के अधिकारियों ने बताया कि लगभग 20 वर्षों बाद ऐसी प्रदर्शनी लगाई गई है, जहां विभाग ने अपने बेशकीमती दस्तावेज प्रदर्शित किए हैं। उन्होंने बताया कि पुरालेख विभाग ने खालसा दरबार 1839-1840, 1841-1846 का प्रशासनिक रिकॉर्ड, तोशाखाना, पंजाब गजट 1857, महाराजा रणजीत सिंह का शाही दरबार, तवारीख राज खालसा, महाराजा रणजीत सिंह के राज्य का नक्शा, महाराजा की वंशावली, खालसा दरबार का मिलिट्री रिकॉर्ड, 1840 में महाराजा रणजीत सिंह पर लिखी पहली पुस्तक आदि दस्तावेज प्रदर्शित किए हैं।

इस मौके गैर सरकारी संस्था पंजाब डिजिटल लाइब्रेरी, चंडीगढ़ के आउटरीच डायरेक्टर दलजीत सिंह और आउटरीच कोऑर्डिनेटर गीतांजली ने बताया कि सिख राज के समय जो विदेशी कलाकार और लेखक पंजाब आए और उन्होंने सिख राज के बारे में जो कुछ देखा, लिखा और चित्रित किया तथा अपना दृष्टिकोण बनाया, उसके बारे में यह प्रदर्शनी दर्शकों को अवगत करवाने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि यह प्रदर्शनी दुर्लभ मूल पुरालेख सामग्री को प्रदर्शित करते हुए पंजाब और सिख साम्राज्य से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कलात्मक और साहित्यिक रुझानों को दर्शाती है।

उन्होंने बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका और पंजाब के पंजाब डिजिटल लाइब्रेरी इंटर्न्स द्वारा तैयार की गई यह प्रदर्शनी सैलानियों को पंजाब के शाही विरासतपूर्ण माहौल में मूल दस्तावेजों, ऐतिहासिक कलाकृतियों और कम देखे गए दृष्टिकोणों का अनुभव करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है, जिससे अतीत और वर्तमान के बीच एक सार्थक संबंध बनता है।

दलजीत सिंह ने आगे बताया कि पंजाब डिजिटल लाइब्रेरी पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण और प्रसार के लिए समर्पित है और हमारे पास 100 मिलियन पन्नों के डिजिटाइजेशन के साथ पीडीएल दुनिया में पंजाब का सबसे बड़ा भंडार है। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से पंजाब के इतिहास, स्मृति और सांस्कृतिक समृद्धि को दुनिया के साथ साझा किया जा रहा है।

यहां पंजाबी यूनिवर्सिटी के उद्यमिता, नवाचार और करियर हब द्वारा उप समूह ग्रामीण पर्यटन और पारंपरिक कलाओं के तहत विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई पारंपरिक वस्तुओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई है।

फोटो कैप्शन – शीश महल पटियाला में पंजाब सखी शक्ति क्राफ्ट मेले में लगी दुर्लभ दस्तावेजों और चित्रों की प्रदर्शनी देखते हुए दर्शक।

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