ऑनलाइन शिकायत प्रणाली से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही
फ़तेहाबाद, 20 फरवरी 2026 (संजीव शर्मा): महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और समान कार्य वातावरण उपलब्ध करवाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों के त्वरित एवं पारदर्शी निपटारे के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित शी-बॉक्स पोर्टल की सुविधा का विस्तार किया गया है। अब निजी क्षेत्र में कार्यरत महिलाएं भी इस पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगी।
डीसी डॉ. विवेक भारती ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि पहले 24 जुलाई, 2017 को यह ऑनलाइन सुविधा केवल सरकारी महिला कर्मचारियों के लिए शुरू की गई थी, लेकिन अब इसे निजी क्षेत्र की कामकाजी महिलाओं के लिए भी प्रभावी रूप से लागू किया गया है, जिससे अधिकाधिक महिलाओं को न्याय प्राप्त करने में सहूलियत मिलेगी।
डीसी ने बताया कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के तहत सभी सरकारी एवं निजी संस्थानों में यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। प्रत्येक निजी प्रतिष्ठान में कम से कम चार सदस्यों वाली समिति गठित की जानी चाहिए, जो प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति करती है।
उन्होंने बताया कि शी-बॉक्स पोर्टल महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। इस पोर्टल के माध्यम से दर्ज की गई शिकायत संबंधित विभाग या संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति को ऑनलाइन अग्रेषित की जाती है। इसके पश्चात समिति द्वारा निर्धारित समय सीमा में जांच कर कार्रवाई की जाती है तथा उसकी रिपोर्ट भी पोर्टल पर अपडेट की जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
डीसी ने जिले के सभी सरकारी व निजी संस्थानों से आह्वान किया कि वे अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें तथा अपने यहां गठित आंतरिक शिकायत समितियों को सक्रिय रखें। साथ ही उन्होंने कामकाजी महिलाओं से अपील की कि यदि उन्हें कार्यस्थल पर किसी प्रकार का उत्पीड़न झेलना पड़े तो वे बिना संकोच शी-बॉक्स पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कर न्याय प्राप्त करें।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण प्रदान करना उसका मूल आधार है। सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें हर क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध करवाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।






