मुंबई, 8 फरवरी 2026: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने लोगों से विकिपीडिया और सामान्य मीडिया कवरेज पर भरोसा न करने की अपील करते हुए उन्हें “भ्रामक” और “प्रचार आधारित” बताया। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस को समझने के लिए प्रत्यक्ष अनुभव और मूल स्रोतों पर आधारित राय बनानी चाहिए।
भागवत ने “हिंदू राष्ट्र” की अवधारणा को राजनीतिक नहीं, बल्कि आत्मनिष्ठ सेवा, उत्कृष्टता और निःस्वार्थ भाव से राष्ट्र निर्माण का आह्वान बताया। उन्होंने कहा कि “हिंदू” कोई धार्मिक नहीं, बल्कि सभ्यतागत पहचान है, जो भारत के सभी निवासियों को समेटती है।
उन्होंने सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि हिंदू समाज की एकजुटता ही देश की प्रगति और सुरक्षा की आधारशिला है। साथ ही, स्वदेशी को जीवनशैली बताते हुए घरेलू उत्पादों के उपयोग और देश में रोजगार बढ़ाने की वकालत की।






