नियमों के तहत ही मिलेगा लाभ: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
चंडीगढ़, 5 फरवरी 2026: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पेंशन को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल लंबी सेवा किसी कर्मचारी को पेंशन का हकदार नहीं बनाती। पेंशन कोई इनाम नहीं, बल्कि नियुक्ति प्रक्रिया और सेवा नियमों के तहत मिलने वाला एक कानूनी लाभ है।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी ने नागरिक क्षेत्र में पुनर्नियुक्ति के आधार पर पेंशन की मांग की थी। याचिकाकर्ता को पंजाब बिजली नियामक आयोग में अस्थायी पद पर नियुक्त किया गया था, लेकिन उसे पेंशन का लाभ नहीं दिया गया।
अदालत ने लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) अशोक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति ऐसी नहीं थी, जिससे उन्हें कानूनी रूप से पेंशन का अधिकार मिल सके। कोर्ट ने साफ किया कि पेंशन का अधिकार तभी उत्पन्न होता है, जब सेवा की शर्तें और नियम इसकी अनुमति देते हों।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2002 में याचिकाकर्ता की नियुक्ति पुनर्नियुक्ति के आधार पर की गई थी और नियुक्ति पत्र में पद को पूरी तरह अस्थायी बताया गया था, जिसे किसी भी समय समाप्त किया जा सकता था। कोर्ट ने यह भी कहा कि आयोग में कभी भी स्थायी या पेंशन योग्य पद सृजित किए जाने के प्रमाण नहीं मिले।
अदालत ने यह भी नोट किया कि वर्ष 2015 में अधिसूचित सेवा नियमों में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि आयोग में सभी नियुक्तियां डेपुटेशन, पुनर्नियुक्ति या अनुबंध के आधार पर होंगी और इनमें पेंशन जैसे लाभ शामिल नहीं होंगे। कोर्ट ने दोहराया कि भले ही पेंशन एक संवैधानिक अधिकार हो सकता है, लेकिन यह तभी लागू होता है जब नियुक्ति और सेवा नियम उसकी शर्तों को पूरा करते हों।






