नई दिल्ली, 31 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार और अनुच्छेद 21A के तहत शिक्षा के अधिकार का हिस्सा है। अदालत ने निर्देश दिया है कि देश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में, शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में, छात्राओं को उच्च गुणवत्ता वाले बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड मुफ्त उपलब्ध कराए जाएं।
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन की समुचित सुविधाएं सुनिश्चित करने के भी आदेश दिए हैं। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। आदेश का पालन न होने पर स्कूलों की मान्यता रद्द की जा सकती है।






