पंजाबी यूनिवर्सिटी में 37वीं पंजाबी भाषा विकास कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन
पटियाला, 29 जनवरी 2026: पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि हमें पंजाबी संस्कृति और भाषा की विशिष्ट पहचान को हर हाल में बनाए रखना होगा। वे पंजाबी यूनिवर्सिटी के पंजाबी भाषा विकास विभाग द्वारा आयोजित 37वीं पंजाबी भाषा विकास कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस कॉन्फ्रेंस का विषय “उच्च शिक्षा में पंजाबी भाषा का माध्यम के रूप में उपयोग: समस्याएं और समाधान” रहा।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में यह जरूरी है कि बौद्धिक विकास को रुकने न दिया जाए और इसमें पुस्तकों की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के सभी वर्गों के सहयोग से ही इन योजनाओं की सफलता संभव है।
पंजाबी यूनिवर्सिटी के उप-कुलपति डॉ. जगदीप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीकी युग में अपने सांस्कृतिक विरसे को सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि एआई के दौर में डेटा का महत्व बढ़ गया है और यह हमारी जिम्मेदारी है कि पंजाबी भाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़ा प्रमाणिक डेटा इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षा का माध्यम बनाने पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे पंजाबी भाषा विकास विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
विशेष अतिथि के रूप में शामिल डॉ. जसबीर सिंह गिल (यूएसए) ने पंजाबी भाषा के संदर्भ में साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में हो रहे कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंजाब को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का केंद्र बनाए जाने की आवश्यकता है।
कॉन्फ्रेंस के मुख्य वक्ता डॉ. मलकीत सिंह सैनी ने विज्ञान की शिक्षा पंजाबी भाषा में दिए जाने से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधानों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शब्दावली की कमी के बावजूद पंजाबी में विज्ञान पढ़ाना असंभव नहीं है। उन्होंने अंग्रेजी और रूसी भाषाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे इन भाषाओं ने अन्य भाषाओं से शब्द उधार लेकर ज्ञान का विस्तार किया है।
धन्यवाद ज्ञापन डीन अकादमिक मामले डॉ. जसविंदर सिंह बराड़ ने प्रस्तुत किया, जबकि उद्घाटन सत्र का संचालन पंजाबी भाषा विकास विभाग के प्रमुख डॉ. गुरसेवक लांबी ने किया। इस अवसर पर विभाग द्वारा प्रकाशित दो पत्रिकाओं और कुछ पुस्तकों का भी विमोचन किया गया।






