भारत का बाहरी क्षेत्र मजबूत: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026: केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया। सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत का बाहरी क्षेत्र मजबूत बना हुआ है और मजबूत निर्यात, सशक्त सेवा व्यापार तथा बढ़ते वैश्विक व्यापार नेटवर्क के कारण वैश्विक एकीकरण और गहरा हुआ है। यह भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता, विविधीकरण और वैश्विक मांग के अनुरूप ढलने की क्षमता को दर्शाता है।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की चालू खाता संरचना में माल व्यापार घाटे की भरपाई सेवाओं और निजी हस्तांतरणों (रेमिटेंस) से होने वाले मजबूत शुद्ध प्रवाह से हो रही है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (H1 FY26) में चालू खाता घाटा (CAD) घटकर 15 अरब डॉलर (GDP का 0.8 प्रतिशत) रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 25.3 अरब डॉलर (GDP का 1.3 प्रतिशत) था।
सर्वेक्षण में बताया गया है कि भारत Q2 FY26 में न्यूज़ीलैंड, ब्राज़ील, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा जैसे अधिक घाटे वाले देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है।
भारत FY25 में 135.4 अरब डॉलर के साथ दुनिया में सबसे अधिक रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश बना रहा, जिससे बाहरी खाते को स्थिरता मिली। इसमें उन्नत अर्थव्यवस्थाओं से आने वाली रेमिटेंस की हिस्सेदारी बढ़ी है, जो कुशल और पेशेवर श्रमिकों के बढ़ते योगदान को दर्शाती है।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वैश्विक वित्तीय सख्ती के बावजूद भारत ने FY25 में GDP के 18.5 प्रतिशत के बराबर सकल निवेश प्रवाह आकर्षित किया। UNCTAD के आंकड़ों के मुताबिक, भारत दक्षिण एशिया में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना रहा और इंडोनेशिया व वियतनाम जैसे प्रमुख एशियाई देशों से आगे रहा।
भारत 2024 में ग्रीनफील्ड निवेश घोषणाओं में वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर रहा, जहां 1,000 से अधिक परियोजनाएं घोषित की गईं। साथ ही 2020-24 के बीच डिजिटल ग्रीनफील्ड निवेश के लिए भारत सबसे बड़ा गंतव्य बनकर उभरा, जिसमें 114 अरब डॉलर का निवेश आया। अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान सकल FDI प्रवाह बढ़कर 64.7 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 55.8 अरब डॉलर था। यह वैश्विक सुस्ती के बावजूद निवेशकों के भरोसे और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के संदर्भ में सर्वेक्षण में कहा गया है कि प्रवाह और निकासी के चक्र वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों से जुड़े रहते हैं। वर्ष के दौरान छह महीनों में शुद्ध निकासी और तीन महीनों में शुद्ध प्रवाह दर्ज किया गया, जिससे कुल मिलाकर सीमित शुद्ध संतुलन रहा। इसके बावजूद, मध्यम अवधि में विदेशी निवेशकों का भारत को लेकर दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 16 जनवरी 2026 तक बढ़कर 701.4 अरब डॉलर हो गया, जो मार्च 2025 के अंत में 668 अरब डॉलर था। यह भंडार लगभग 11 महीने के आयात और सितंबर 2025 के अंत तक बाहरी ऋण के लगभग 94 प्रतिशत को कवर करने में सक्षम है, जो एक मजबूत तरलता सुरक्षा प्रदान करता है।
रुपये के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए सर्वेक्षण में कहा गया है कि 1 अप्रैल 2025 से 15 जनवरी 2026 के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 5.4 प्रतिशत कमजोर हुआ। मुद्रा की मजबूती घरेलू बचत, बाहरी संतुलन, स्थिर FDI, और नवाचार व उत्पादकता पर आधारित निर्यात प्रतिस्पर्धा से तय होती है।
भारत का बाहरी ऋण सितंबर 2025 के अंत तक बढ़कर 746 अरब डॉलर हो गया, जबकि बाहरी ऋण-से-GDP अनुपात 19.2 प्रतिशत रहा। बाहरी ऋण भारत के कुल ऋण का 5 प्रतिशत से भी कम है, जिससे बाहरी क्षेत्र से जुड़े जोखिम सीमित रहते हैं। दिसंबर 2024 के अंत तक वैश्विक बाहरी ऋण में भारत की हिस्सेदारी केवल 0.69 प्रतिशत रही।
आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी जोर दिया गया है कि भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए विनिर्माण लागत घटाने पर समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। मजबूत बाहरी स्थिरता और मुद्रा की विश्वसनीयता के लिए विनिर्माण निर्यात क्षमता बढ़ाने, उत्पादकता आधारित औद्योगिक नीति और उच्च-मूल्य सेवाओं के पूरक विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है।






