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बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में 12 फरवरी को पंजाब समेत देशभर में आंदोलन

पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन का ऐलान

पटियाला (पंजाब), 28 जनवरी 2026: बिजली क्षेत्र के निजीकरण और प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 के खिलाफ पंजाब में आंदोलन तेज होने जा रहा है। पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने संयुक्त संघर्ष समिति (जॉइंट एक्शन कमेटी) के साथ मिलकर 12 फरवरी 2026 को पूरे पंजाब में राज्यव्यापी विरोध सभाएं आयोजित करने का ऐलान किया है। इसी दिन देश के अन्य राज्यों में बिजली क्षेत्र के कर्मचारी कार्य बहिष्कार करेंगे।

इस आंदोलन की घोषणा करते हुए पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव अजयपाल सिंह अटवाल ने कहा कि यह विरोध देशभर के लाखों बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों में व्याप्त गुस्से और चिंता की अभिव्यक्ति है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां भारत के सार्वजनिक बिजली क्षेत्र को कमजोर करने और धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में ले जा रही हैं।

इस बीच, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) ने भी केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। फेडरेशन ने कहा है कि यदि चालू बजट सत्र के दौरान संसद में विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया गया, तो देशभर में बिजली इंजीनियर और कर्मचारी तत्काल “लाइटनिंग एक्शन” शुरू करेंगे। इनमें कामकाज ठप करना और बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना शामिल होगा।

AIPEF के नेताओं ने कहा कि बिजली देश की अर्थव्यवस्था, कृषि, उद्योग और ग्रामीण जीवन की रीढ़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति, 2026 सस्ती बिजली, सार्वजनिक स्वामित्व, संघीय ढांचे और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा हमला हैं।

फेडरेशन ने केंद्र सरकार द्वारा बिजली क्षेत्र में निजीकरण को लेकर अपनाई जा रही नीतियों का कड़ा विरोध किया। इनमें वितरण में मल्टी-लाइसेंसिंग, जबरन स्मार्ट मीटरिंग, ट्रांसमिशन में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) और टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB), संचालन का आउटसोर्सिंग और नौकरियों का ठेकाकरण शामिल हैं। AIPEF ने चंडीगढ़ में हुए निजीकरण प्रयोग को विफल बताते हुए उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में ऐसी ही योजनाओं के प्रति आगाह किया।

AIPEF के मीडिया सलाहकार वी.के. गुप्ता ने बताया कि फेडरेशन ने सरकार के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 को तुरंत वापस लेने की मांग शामिल है। फेडरेशन का आरोप है कि यह विधेयक निजीकरण और मल्टी-लाइसेंसिंग को बढ़ावा देता है, क्रॉस-सब्सिडी को कमजोर करता है, बिजली दरों में वृद्धि करेगा और निजी कंपनियों को केवल मुनाफे वाले उपभोक्ताओं को चुनने की छूट देगा।

इसके अलावा, AIPEF ने शांति अधिनियम (SHANTI Act), 2025 को भी वापस लेने की मांग की है, यह कहते हुए कि यह परमाणु सुरक्षा और जवाबदेही को कमजोर करता है और इस क्षेत्र को निजी व विदेशी हितों के लिए खोलता है। फेडरेशन ने राष्ट्रीय विद्युत नीति, 2026 को भी रद्द करने की मांग की है, जिस पर आरोप है कि यह उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण—तीनों क्षेत्रों में आक्रामक निजीकरण को बढ़ावा देती है।

बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के इस ऐलान के बाद आने वाले दिनों में बिजली क्षेत्र में बड़े आंदोलन की संभावना जताई जा रही है।

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