नई दिल्ली, 27 जनवरी 2026: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा हाल ही में जारी किए गए “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए नियम, 2026” को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन नियमों में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा गैर-समावेशी है और इससे कुछ वर्गों को संस्थागत संरक्षण से बाहर कर दिया गया है।
विनीत जिंदल द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि नियम 3(c) के तहत जाति-आधारित भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तक सीमित कर दिया गया है, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों को शिकायत निवारण और सुरक्षा से वंचित किया जा रहा है।
याचिका में इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) और 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि नियम 3(c) के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाए और जाति-आधारित भेदभाव की ऐसी परिभाषा तय की जाए जो जाति-निरपेक्ष और संवैधानिक रूप से समान हो।
याचिका में केंद्र सरकार और UGC से यह भी सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि समान अवसर केंद्र और हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए उपलब्ध कराई जाएं।






