आज देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। यह दिन केवल तिरंगा फहराने या परेड देखने का अवसर नहीं, बल्कि उस संविधान को याद करने का दिन है, जिसने भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया। यह दिन हमें आज़ादी की उस कीमत की याद दिलाता है, जो शहीदों ने अपने रक्त से चुकाई।
पंजाब की धरती, जिसने स्वतंत्रता संग्राम में सबसे बड़ी कुर्बानियां दीं, आज भी देश की रीढ़ बनी हुई है। चाहे देश को अनाज से आत्मनिर्भर बनाना हो या सीमाओं की रक्षा, पंजाब और पंजाबियों का योगदान अतुलनीय है। विभाजन का सबसे गहरा घाव भी इसी धरती ने झेला, लेकिन नफरत के बजाय भाईचारे और मेहनत को चुना।
आज का भारत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। नशा, अपराध, सामाजिक विभाजन और युवाओं में बढ़ती निराशा जैसे मुद्दे हमारे सामने हैं। इन समस्याओं का समाधान केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की साझी जिम्मेदारी है। कानून का राज, सामाजिक एकता और नैतिक मूल्यों की मजबूती ही मजबूत राष्ट्र की पहचान होती है।
गणतंत्र दिवस हमें यह भी याद दिलाता है कि अधिकारों के साथ कर्तव्य भी उतने ही जरूरी हैं। संविधान ने हमें बोलने, जीने और आगे बढ़ने की आज़ादी दी है, लेकिन साथ ही देश, समाज और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी भी सौंपी है। जब युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएगी, तभी भारत अपने सपनों को साकार कर पाएगा।
आज जरूरत है कि हम जाति, धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर भारत को पहले रखें। शहीदों के सपनों का भारत वही होगा, जहां कानून सबके लिए समान हो, अवसर सबको मिले और हर नागरिक खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।
77वें गणतंत्र दिवस पर शहीद-ए-आज़म न्यूज़ डॉट कॉम देशवासियों से आह्वान करता है कि हम संविधान की आत्मा को समझें, एकता को मजबूत करें और एक जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें।
वंदे मातरम्।
जय हिंद।

(रंजना कराकोटी)






