अंतरराष्ट्रीय लेखक और शिक्षाशास्त्री अनिल भारती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र
टोक्यो जापान के रेंकोजी मंदिर में सुरक्षित रखी गई
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियों के DNA परीक्षण हेतु मांग की।
पटियाला: अंतरराष्ट्रीय लेखक और शिक्षा शास्त्री अनिल कुमार भारती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर मांग की है कि वे टोक्यो जापान के रेंकोजी मंदिर में सुरक्षित रखी गई नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी की अस्थियों का डी एन ए टैस्ट करवाकर नेता जी सुभाष चंद्र बोस जी के जीवन/मृत्यु सम्बन्धी रहस्यों से पर्दा उठा कर अपना वचन पूरा करने के साथ साथ भारत के प्रधानमंत्री के रूप में भारत की जनता के प्रति अपना कर्तव्य भी निभाएं।
अंतरराष्ट्रीय लेखक और शिक्षाशास्त्री अनिल कुमार भारती एक समाजसेवी जागरूक नागरिक और सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। उन्होंने इस पत्र के माध्यम से राष्ट्र के एक ऐसे विषय की ओर प्रधानमंत्री मोदी का ध्यान आकर्षित किया है, जो करोड़ों भारतीयों की भावनाओं और हमारे राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा है।नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन/ मृत्यु 1945 से ही एक रहस्य बनी हुई है। कुछ आधिकारिक दस्तावेजों में 18 अगस्त 1945 की विमान दुर्घटना को स्वीकार भी किया गया है, किंतु मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट और भारतीय जनमानस में व्याप्त संदेह इस कथित सत्य पर प्रश्नचिह्न लगाते रहे हैं। वर्तमान समय में, जब भारत विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व कर रहा है, इस अनसुलझे रहस्य को सुलझाना अब असंभव नहीं है। अतः शिक्षाशास्त्री अनिल भारती ने निम्नलिखित तर्कपूर्ण ढंग से यह मांग की है कि वैज्ञानिक समाधान के तौर पर टोक्यो के रेंकोजी मंदिर में सुरक्षित रखी गई अस्थियों का डी एन ए परीक्षण आधुनिक ‘माइटोकॉन्ड्रियल डी एन ए’ तकनीक के माध्यम से कराया जाए। यह वह अति आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक है जिस के माध्यम से सौ वर्षों से पुराने अवशेषों से भी पारिवारिक सदस्यों के डी एन ए मिलान करके सच्चाई का पता लगाया जा सकता है। इस टैस्ट से पूरी तरह से सच का पता चल जाएगा। यदि वे अवशेष नेताजी के हैं, तो उनकी पुत्री अनीता बोस पाफ या उनके परिवार के रक्त संबंधों से मिलान किया जाना, ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ कर देगा।
इतिहास की शुद्धि: यदि परीक्षण सकारात्मक रहता है, तो राष्ट्र पूरे सम्मान के साथ अपने महानायक की अस्थियों को भारत लाकर उनकी अंतिम विदाई की अधूरी रस्म को पूर्ण कर सकेगा। यदि परीक्षण नकारात्मक रहता है, तो हम सभी नए सिरे से सच की खोज कर सकेंगे।
जनमानस को सुकून: नेताजी के करोड़ों अनुयायी और देशभक्त भारतीय आज भी इस उहापोह में हैं कि उनके प्रिय नेता का अंत कैसे हुआ। सत्य बोध से न केवल इतिहास स्पष्ट होगा, बल्कि देशवासियों के मन को असीम सुकून मिलेगा।
इसी के साथ साथ अनिल कुमार भारती ने यह भी लिखा है कि सत्य की खोज ही हमारी सनातन संस्कृति का आधार है और मुझे पूर्ण विश्वास है कि भारत सरकार, जो महापुरुषों के सम्मान के प्रति सदैव सजग रही है, इस दिशा में निर्णायक कदम अवश्य उठाएगी।
फ़ोटो: अंतरराष्ट्रीय लेखक और शिक्षाशास्त्री अनिल कुमार भारती
जारी करता:
अनिल कुमार भारती,
ईमेल: anilbharti1967@gmail.com
मोबाइल नंबर +917973126853 +919357160608






