चंडीगढ़, 22 जनवरी 2026: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के विस्तार को लेकर एक अहम और निर्णायक कदम उठाया गया है। बुधवार को हाईकोर्ट को अवगत कराया गया कि अदालत भवन के विस्तार और समग्र विकास से जुड़ा प्रस्ताव अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है।
चंडीगढ़ प्रशासन और भारत सरकार ने इस प्रस्ताव को ‘इंटरनेशनल मैनेजमेंट प्लान’ में शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके बाद इसे आगे यूनेस्को को भेजा जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत हाईकोर्ट परिसर में लगभग 20.50 लाख वर्ग फुट अतिरिक्त निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यूटी प्रशासन ने बताया कि 20 जनवरी को हुई चंडीगढ़ हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि हाईकोर्ट के विकास की योजना को ‘फाउंडेशन ले कार्बूजिए, पेरिस’ और भारत सरकार को भेजा जाए।
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने अदालत को जानकारी दी कि केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को बुधवार सुबह ही चंडीगढ़ प्रशासन का पत्र प्राप्त हो चुका है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यह प्रस्ताव यूनेस्को सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भेजा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की मूल इमारत का डिज़ाइन विश्वप्रसिद्ध वास्तुकार ले कार्बूजिए ने तैयार किया था। यह इमारत चंडीगढ़ के प्रतिष्ठित ‘कैपिटल कॉम्प्लेक्स’ का हिस्सा है, जिसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है। इसी कारण हाईकोर्ट के किसी भी विस्तार या निर्माण कार्य के लिए यूनेस्को के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।
हाईकोर्ट लंबे समय से भवन और स्थान की कमी की समस्या उठा रहा है। जहां स्वीकृत संख्या 85 न्यायाधीशों की है, वहीं वर्तमान में केवल 69 कोर्ट रूम ही उपलब्ध हैं। अदालत पहले भी यह स्पष्ट कर चुकी है कि कर्मचारियों को संकुचित कमरों में काम करना पड़ता है और कई स्थानों पर फाइलें फर्श पर रखने की नौबत आ जाती है।
इस महत्वपूर्ण मामले में अब अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।






