दिल्ली हाईकोर्ट ने पीड़िता के पिता की मौत मामले में सजा निलंबन याचिका खारिज की
नई दिल्ली, 19 जनवरी 2026: दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी और पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में मिली 10 साल की सजा को निलंबित करने की मांग की थी। अदालत ने साफ कहा कि इस मामले में राहत देने का कोई आधार नहीं है और यह एक गंभीर अपराध से जुड़ा हुआ मामला है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत एक अत्यंत गंभीर मामला है, ऐसे में सजा निलंबन का कोई औचित्य नहीं बनता। इसके साथ ही सेंगर को इस प्रकरण में अदालत से कोई राहत नहीं मिली।
गौरतलब है कि कुलदीप सिंह सेंगर वर्ष 2018 से जेल में बंद है और उन्नाव दुष्कर्म मामले में वह उम्रकैद की सजा भी काट रहा है। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा निलंबित किए जाने को लेकर विवाद भी खड़ा हुआ था, जिसके बाद पीड़िता ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान कुछ लोग सेंगर के समर्थन में भी तख्तियां लेकर सामने आए थे।
इस मामले में सीबीआई ने 26 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल कर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सेंगर की रिहाई पर रोक लगाते हुए कहा कि आमतौर पर सजा निलंबन के आदेशों में हस्तक्षेप नहीं किया जाता, लेकिन यह एक विशेष परिस्थिति है क्योंकि दोषी एक अन्य मामले में अब भी जेल में बंद है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता ने कहा, “मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं। मुझे सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ मिला है। मैं शुरू से ही न्याय के लिए आवाज उठाती रही हूं। मुझे सभी अदालतों पर भरोसा है और सुप्रीम कोर्ट ने मुझे न्याय दिया है।”






