चंडीगढ़, 4 जनवरी 2026: चंडीगढ़ की जिला अदालत ने पिता के हत्या के मामले में दो साल की सजा काट चुकी बेटी आशा को आज बरी कर दिया। अदालत ने यह फैसला गवाहों के बयान में विरोधाभास और जांच में कमी को देखते हुए सुनाया।
कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि जांच के दौरान तथ्यों को सही तरीके से परखना आवश्यक है, जबकि इस मामले में पुलिस ने ऐसा नहीं किया, जो गंभीर सवाल खड़े करता है। अदालत के इस फैसले के बाद आशा, जिसे दो साल तक पिता की हत्या का दोषी मानकर जेल में रखा गया था, निर्दोष साबित होकर अपने घर लौटी।
आशा की मां मालती देवी ने कहा कि पुलिस ने पूरे मामले को केवल एक ही थ्योरी पर आधारित किया और गवाह के बयान को ही मामला मान लिया। जबकि उनके पति की मृत्यु कोई हत्या नहीं बल्कि एक हादसा थी। उन्होंने कहा, “मैं और मेरी बेटी आशा, साथ में चार बच्चे, पुलिस के सामने बार-बार यह कहते रहे कि यह हत्या नहीं, हादसा है, लेकिन हमारी नहीं सुनी गई।”
इस फैसले के बाद समाज में भी कई सवाल उठ रहे हैं कि यदि बेटी ने पिता की हत्या नहीं की तो असली जिम्मेदार कौन है और क्या पुलिस ने सभी पहलुओं की सही जांच की।






