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चंडीगढ़ में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में बड़ा खुलासा, हजारों शिकायतें दर्ज ही नहीं हुईं

चंडीगढ़, 29 दिसंबर 2025: चंडीगढ़ में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि शिकायतों के मुकाबले एफआईआर की संख्या बेहद कम है। वर्ष 2025 में अब तक साइबर सेल को कुल 8,495 शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि इनमें से केवल 150 मामलों में ही एफआईआर दर्ज की गई। इसका मतलब है कि हजारों पीड़ितों की शिकायतें बिना प्राथमिकी के ही खारिज कर दी गईं।

यह स्थिति न केवल पीड़ितों को न्याय से वंचित कर रही है, बल्कि उनके साथ हुई धोखाधड़ी की रकम की वसूली को भी बेहद मुश्किल बना रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि एफआईआर दर्ज न होने से जांच आगे नहीं बढ़ पाती और अपराधियों को खुला मैदान मिल जाता है।

मास्टरमाइंड तक पहुंचने में नाकामी

साइबर धोखाधड़ी के मामलों में एक बड़ी कमजोरी यह सामने आई है कि पुलिस अब तक गिरोह के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने में असफल रही है। कार्रवाई के नाम पर जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई, वे अधिकतर ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अपने बैंक खाते धोखाधड़ी करने वालों को उपलब्ध कराए थे। इन खाताधारकों को ठगी की गई रकम का मात्र 10 प्रतिशत हिस्सा दिया गया, जबकि असली अपराधी पर्दे के पीछे ही रहे।

इस वजह से धोखाधड़ी की गई राशि का बड़ा हिस्सा आज भी बरामद नहीं हो सका है।

पीड़ितों की बढ़ती परेशानी

धोखाधड़ी के बाद जब संबंधित बैंक खातों को फ्रीज किया जाता है, तो पीड़ितों को अपनी ही रकम छुड़वाने के लिए साइबर सेल और जिला अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं। कई मामलों में लोग वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें अपने पैसे वापस नहीं मिल पाए हैं।

यह पूरा मामला चंडीगढ़ में साइबर अपराधों से निपटने की व्यवस्था और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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