केएफसी कर्मचारी को मिला करीब 67 हजार पाउंड का मुआवजा
लंदन, 29 दिसंबर 2025: दक्षिण-पूर्वी लंदन स्थित केएफसी फ्रेंचाइज़ी आउटलेट में गलत तरीके से बर्खास्तगी और नस्लीय भेदभाव के आरोप लगाने वाले एक भारतीय कर्मचारी को अदालत से बड़ी राहत मिली है। रोजगार ट्रिब्यूनल ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए करीब 67,000 पाउंड (लगभग 70 लाख रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
तमिलनाडु निवासी मधेश रविचंद्रन ने ट्रिब्यूनल को बताया कि उनके श्रीलंकाई तमिल मैनेजर ने उनके साथ नस्लीय भेदभाव किया और उन्हें “गुलाम” कहने के साथ-साथ “भारतीय धोखेबाज़ होते हैं” जैसी अपमानजनक टिप्पणियां कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय होने के कारण उनके साथ कम अनुकूल व्यवहार किया गया।
इस सप्ताह प्रकाशित फैसले में ट्रिब्यूनल के जज पॉल एबोट ने केएफसी फ्रेंचाइज़ी संचालक नेक्सस फूड्स लिमिटेड के खिलाफ गलत बर्खास्तगी और नस्लीय भेदभाव के आरोपों को सही ठहराया। फैसले में कहा गया कि रविचंद्रन की छुट्टी की मांग इसलिए खारिज की गई क्योंकि वह भारतीय थे, जबकि श्रीलंकाई तमिल कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाती थी। साथ ही, उन्हें नस्ल के आधार पर अपमानजनक शब्द कहे गए, जो स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण व्यवहार है।
रविचंद्रन ने जनवरी 2023 में केएफसी के वेस्ट विकहैम आउटलेट में काम शुरू किया था। कई महीनों तक कथित उत्पीड़न झेलने के बाद जुलाई 2023 में स्थिति तब और बिगड़ गई, जब मैनेजर ने उनसे शिफ्ट में अतिरिक्त घंटे काम करने का दबाव डाला और अंततः उन्हें नोटिस थमा दिया।
अदालत के इस फैसले को कार्यस्थल पर नस्लीय भेदभाव के खिलाफ एक अहम मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।






