नई दिल्ली, 27 दिसंबर 2025: लंदन में विजय माल्या के 70वें जन्मदिन के मौके पर ललित मोदी द्वारा साझा किए गए एक वीडियो, जिसमें उन्होंने खुद को “भारत का सबसे बड़ा भगोड़ा” बताया, पर भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश से फरार आर्थिक अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें भारतीय अदालतों के सामने पेश किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दिसंबर 2025 में हुई प्रेस वार्ता में बताया कि भारत सरकार ब्रिटेन समेत कई देशों के साथ लगातार कूटनीतिक बातचीत कर रही है, ताकि विजय माल्या, ललित मोदी और अन्य भगोड़े आर्थिक अपराधियों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को तेज किया जा सके। उन्होंने कहा कि इन मामलों में कई कानूनी जटिलताएं हैं, लेकिन सरकार पूरी मजबूती से प्रयास कर रही है।
सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि विजय माल्या के प्रत्यर्पण को ब्रिटेन की अदालतों ने मंजूरी दे दी है, लेकिन कथित तौर पर शरण (Asylum) से जुड़े एक गोपनीय कानूनी मुद्दे के कारण इसमें देरी हो रही है। इसके बावजूद, भारत सरकार भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत सख्त कार्रवाई करते हुए उनकी संपत्तियां जब्त कर रही है।
सरकार के अनुसार, अब तक विजय माल्या, नीरव मोदी और अन्य भगोड़ों की जब्त और नीलाम संपत्तियों से लगभग 19,187 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है। विजय माल्या पर बैंकों का कुल बकाया करीब 22,065 करोड़ रुपये है, जिसमें से 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली हो चुकी है।
सरकार ने माना कि विदेशी कानूनों, मानवाधिकार और शरण संबंधी प्रावधानों का सहारा लेकर ये भगोड़े प्रक्रिया को लंबा खींच रहे हैं। वहीं, ललित मोदी द्वारा साझा किए गए वीडियो को विशेषज्ञों ने भारतीय कानून व्यवस्था का मजाक उड़ाने की कोशिश बताया है।
भारत सरकार ने दोहराया है कि भले ही इसमें समय लग रहा हो, लेकिन सभी दोषियों को देश वापस लाकर भारतीय न्याय व्यवस्था के तहत मुकदमे का सामना कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।






