HomePunjabफतेहगढ़ साहिब पहुंचे मुख्यमंत्री भगवंत मान

फतेहगढ़ साहिब पहुंचे मुख्यमंत्री भगवंत मान

साहिबजादों के बलिदान को बताया विश्व में अद्वितीय

फतेहगढ़ साहिब, 26 दिसंबर 2025 : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान गुरुवार सुबह अपनी पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर के साथ ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब पहुंचे और माथा टेककर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने साहिबजादों के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए इसे विश्व इतिहास में बेमिसाल बताया।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, “आज पूरी दुनिया फतेहगढ़ साहिब में छोटे साहिबजादों के बलिदान के आगे नतमस्तक है। ऐसा बलिदान दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता। इस गाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है, ताकि वे जान सकें कि धर्म की रक्षा के लिए किस तरह के त्याग किए गए।”

प्रेस से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु फतेहगढ़ साहिब पहुंचते हैं, ताकि छोटे साहिबजादों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का आयोजन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह गुरु तेग बहादुर जी की शहादत की 350वीं वर्षगांठ के साथ जुड़ा हुआ है। उन्होंने कठोर सर्दी में साहिबजादों और माता गुजरी जी द्वारा सहे गए कष्टों को सिख इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय बताया।

तीन दिवसीय शहीदी सभा के दौरान लगभग 50 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पंजाब सरकार ने व्यापक प्रबंध किए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी तैनात किए गए हैं, शटल सेवाएं, पार्किंग व्यवस्था, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं, आपातकालीन सुविधा और सुरक्षा प्रबंधों को प्राथमिकता दी गई है।

मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि आनंदपुर साहिब, दमदमा साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब को आधिकारिक तौर पर “पवित्र शहर” का दर्जा दे दिया गया है। इसके लिए अधिसूचनाएं जारी हो चुकी हैं और इन धार्मिक स्थलों के विकास व सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू किया जा रहा है।

“वीर बाल दिवस” को लेकर चल रहे विवाद पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जो नेता आज इसके नाम का विरोध कर रहे हैं, वे पहले स्वयं इसका समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने 2019 की सोशल मीडिया पोस्टों का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा विरोध में निरंतरता और धार्मिक भावना की कमी दिखाई देती है।

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी का कर्तव्य है कि वह साहिबजादों की शिक्षाओं और बलिदान को श्रद्धा के साथ याद रखे और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाए। यह विरासत हमें सिखाती है कि अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी अपने धर्म, साहस और संकल्प पर कैसे अडिग रहा जाता है।

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