नई दिल्ली, 25 दिसंबर 2025: उन्नाव रेप केस में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत देने और सजा निलंबित करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। यह याचिका दो महिला वकीलों अंजले पटेल और पूजा शिल्पकर ने दायर की है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि हाईकोर्ट ने जमानत देते समय अभियोजन पक्ष के अहम साक्ष्यों की अनदेखी की, जिनसे अपराध की गंभीरता, आरोपी की आपराधिक प्रवृत्ति और उसके प्रभाव व दबदबे का पता चलता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि सेंगर ने पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में हत्या की साजिश रचकर न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की थी।
याचिका में याद दिलाया गया है कि आरोपी की धमकाने की क्षमता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस मामले की सुनवाई उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित की थी, ताकि निष्पक्ष ट्रायल सुनिश्चित हो सके। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने बिना ठोस कारण बताए जमानत दे दी, जो कानून के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत “लोक सेवक” की परिभाषा की गलत व्याख्या की और आरोपी को अनुचित लाभ दिया। वहीं, सीबीआई भी हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की तैयारी कर रही है।
गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 15 लाख रुपये के निजी मुचलके पर सेंगर को जमानत दी थी, हालांकि वह पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में अब भी जेल में है।






