मोहाली, 7 दिसंबर 2025: सीजीसी यूनिवर्सिटी, मोहाली ने यूजीसी मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के सहयोग से एक आठ दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह वर्चुअल कार्यक्रम “नई शिक्षा नीति 2020: ओरिएंटेशन एंड सेंसिटाइजेशन प्रोग्राम” विषय पर आधारित था, जिसमें देश भर से 109 से अधिक फैकल्टी सदस्य, शोधकर्ता और शिक्षाविद शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत उद्घाटन सत्र से हुई, जिसे एमएमटीटीसी शिमला की सहायक निदेशक डॉ. शालिनी कश्मीरीया ने संबोधित किया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की परिवर्तनकारी सोच पर प्रकाश डालते हुए सीजीसी यूनिवर्सिटी के प्रयासों की सराहना की। मुख्य भाषण में एमएमटीटीसी के निदेशक एवं एचपीयू शिमला के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. (डॉ.) देश राज ठाकुर ने योग्यता आधारित शिक्षा, समावेशिता और आधुनिक शिक्षण-अधिगम पद्धतियों जैसे नीति के प्रमुख स्तंभों पर विस्तार से चर्चा की।
आठ दिनों तक चले इस कार्यक्रम के दौरान डॉ. साबू के. थॉमस (यूजीसी-एमएमटीटीसी, कालीकट यूनिवर्सिटी), डॉ. पंकज शर्मा (एनआईटीटीटीआर, चंडीगढ़), प्रो. संजीव कुमार शर्मा (एमआरएसपीटीयू, बठिंडा) सहित कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने सत्रों को संबोधित किया।
सत्रों में नई शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिकोण के अनुरूप संस्थागत प्रथाओं को संरेखित करने, अंतर्विषयी शिक्षण को बढ़ावा देने, अकादमिक नेतृत्व को सशक्त करने, भारतीय ज्ञान परंपराओं की समकालीन प्रासंगिकता, अनुसंधान डिजाइन, परिकल्पना निर्माण तथा उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप पर विस्तृत चर्चा की गई।
इस कार्यक्रम ने प्रतिभागी फैकल्टी सदस्यों को व्यावहारिक अंतर्दृष्टि, नवीन शिक्षण रणनीतियों और नीति स्तर की समझ प्रदान की, जिससे वे अपने शिक्षण कार्यों में लचीलापन, रचनात्मकता और शिक्षार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण को प्रभावी रूप से अपनाने में सक्षम होंगे।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री अर्श धालीवाल ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह एफडीपी कार्यक्रम फैकल्टी को नई शिक्षा नीति 2020 को गहराई से समझने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है और छात्र-केंद्रित शिक्षा प्रणाली ही भविष्य के नवाचारकर्ताओं का निर्माण कर सकती है।
समापन सत्र में यूजीसी-एमएमटीटीसी, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की निदेशक प्रो. प्रीति जैन ने विद्यार्थियों की विविधता और समावेशी शिक्षा पर अपने विचार रखे तथा अनुभवात्मक, मिश्रित और समस्या-आधारित शिक्षण पद्धतियों पर जोर दिया। कार्यक्रम के कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. नवदीप शर्मा ने सभी वक्ताओं और सहभागी संस्थानों का आभार व्यक्त किया।






