पटियाला, 3 दिसंबर:
भाषा विभाग पंजाब के निदेशक स. जसवंत सिंह ज़फ़र के नेतृत्व में आयोजित होने वाले मासिक कार्यक्रम ‘पुस्तक बैठक‘ के दौरान आज प्रसिद्ध लेखक और रंगकर्मी राणा रणबीर ‘ज़िंदगी में किताबों की अहमियत’ विषय पर विशेष व्याख्यान देने के लिए शामिल हुए। इस दौरान विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने पिछले महीने पढ़ी गई किताबों के बारे में अपने विचार व्यक्त किए।
पुस्तकों से जुड़ाव बच्चों को राह दिखाता है: ज़फ़र
निदेशक स. जसवंत सिंह ज़फ़र ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि राणा रणबीर एक ऐसे कलाकार हैं जिनकी प्रतिभा के हर रंग में पुस्तकों का प्रभाव झलकता है। यही कारण है कि वह हमेशा अपनी कला के माध्यम से समाज को कोई न कोई ठोस संदेश देने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि जो अभिभावक स्वयं किताबों से जुड़े होते हैं, उनके बच्चे अपने आप ही पुस्तकों की अहमियत समझने लगते हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि शैक्षणिक क्षेत्र में जो शिक्षक स्वयं किताबें पढ़ते हैं, उनके विद्यार्थी भी जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की प्राप्त करते हैं। इसलिए, अभिभावकों और शिक्षकों का बेहतरीन पाठक होना अत्यंत आवश्यक है।
किताबें मनुष्य को चरित्र, ताकत और समानता देती हैं: राणा रणबीर
राणा रणबीर ने ‘ज़िंदगी में किताबों की अहमियत’ विषय पर बोलते हुए कहा कि ‘किताब‘ मनुष्य को चरित्र, ताकत और समानता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि किताबें मनुष्य को हर सुख-दुख से निकालने में सहायक होती हैं और नए सपने दिखाती हैं।
उन्होंने कहा कि किताब मनुष्य को ऐसे संसार के दर्शन कराती है जो हमें सुकून, अक्ल और नई मंजिलों की ओर बढ़ना सिखाता है। किताब मनुष्य की सबसे सच्ची दोस्त है और उसके व्यक्तित्व में निखार लाती है। राणा ने कहा कि जो कलाकार किताबें पढ़ता है, वह समाज को अधिक नज़दीक से समझता है, इसलिए उसकी कला भी आम लोगों की बात करती है और लोगों को अधिक पसंद आती है।
शोध अधिकारी डॉ. सुखदर्शन सिंह चहल ने राणा रणबीर के साथ संवाद किया। अंत में, विभाग द्वारा राणा रणबीर को सम्मानित किया गया।






