बठिंडा, 29 नवंबर 2025: पंजाब में सरकारी बस सेवाओं के ठेका कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। बठिंडा बस अड्डे पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने जहां सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की, वहीं बठिंडा पुलिस के शांत रवैये और सहयोग की खुलकर तारीफ भी की।
धरने के दौरान यह नजारा देखने को मिला कि पुलिस का एक वर्दीधारी जवान खुद बस कर्मियों को लंगर परोस रहा था। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि बठिंडा पुलिस ने गुरुवार को भी उन्हें लंगर खिलाया था। अन्य शहरों में जहाँ पुलिस सख़्त दिखाई दी, वहीं बठिंडा पुलिस ने बेहद संयम और नरमी से काम लिया।
बस अड्डा पुलिस चौकी इंचार्ज जसकरण सिंह समेत भारी पुलिस बल को इलाके में तैनात किया गया था, लेकिन पुलिस ने किसी भी तरह की सख़्ती न दिखाते हुए शांतिपूर्ण ढंग से हालात संभाले रखा।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि जब संगरूर, पटियाला जैसे शहरों में बस कर्मचारियों पर कार्रवाई हो रही थी, तब बठिंडा पुलिस का रवैया बेहद मानवीय रहा।
ठेका कर्मचारियों की यूनियन ने आरोप लगाया कि उनके चार नेता—कुलवंत सिंह, रमिंदर सिंह, नरिंदर सिंह और धर्मिंदर सिंह—अब भी हिरासत में हैं। उनका कहना है कि जब तक इन्हें रिहा नहीं किया जाता, किलोमीटर-आधारित बस स्कीम के टेंडर रद्द नहीं होते और ठेका कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार कभी खाली खजाने का बहाना बनाती है, कभी कानूनी अड़चनें दिखाकर नियमितीकरण से भाग रही है। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे ठेका कर्मचारी विभाग की “रीढ़ की हड्डी” हैं, लेकिन उनके साथ लगातार अन्याय किया जा रहा है।
निजी बस ऑपरेटरों की चांदी—यात्रियों को भुगतना पड़ा खामियाज़ा
सरकारी बसों के पहिए थमने से यात्रियों, विशेषकर महिलाओं को, निजी बसों में किराया देकर सफर करना पड़ा। आमतौर पर सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा का लाभ लेने वाली महिलाओं ने कहा कि हड़ताल के कारण उन्हें मजबूरन निजी बसों का सहारा लेना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकारी नीतियां निजी परिवहन को बढ़ावा दे रही हैं, जबकि सरकारी बसें या तो बंद पड़ी हैं या मरम्मत के अभाव में मुश्किल से चल रही हैं।
कंपनी का दावा—नई बसें केवल पुरानी के बदले
पीआरटीसी के वाइस चेयरमैन बलविंदर सिंह झाड़वां ने कहा कि सरकार किलोमीटर स्कीम के तहत कोई नई बसें नहीं लगा रही। केवल पुरानी और खराब हो चुकी बसों को बदला जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता वर्तमान सरकार से पहले ही हो चुका था।
दिहाती मजदूर सभा के नेता कामरेड माहीपाल ने कहा कि सरकारी बसें बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी आम यात्रियों को उठानी पड़ रही है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि बदलाव के नाम पर जनता को परेशान किया जा रहा है।
बठिंडा में जारी यह आंदोलन सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, जबकि कर्मचारी अपने हक की लड़ाई और तेज करने के मूड में दिख रहे हैं।






