नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र राजनीतिक तकरार से भरपूर रहने वाला है। विपक्ष बिहार चुनाव नतीजों और एसआईआर को बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार पर चुनाव आयोग के कामकाज पर चर्चा के लिए दबाव बनाएगा, जबकि सरकार का कहना है कि आयोग एक स्वायत्त संस्था है और उसके कामकाज पर बहस संभव नहीं।
1 दिसंबर से शुरू हो रहे सत्र के लिए मोदी सरकार ने 10 विधेयकों को सूचीबद्ध किया है, जिनमें निजी क्षेत्र के लिए असैन्य परमाणु क्षेत्र खोलने वाला परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025 भी शामिल है। इसके साथ ही प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक (एसएमसी), 2025 के जरिए तीन पुराने बाजार कानूनों को एकीकृत करने का प्रस्ताव है।
सरकार मध्यस्थता और सुलह अधिनियम में संशोधन, राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक और कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2025 भी पेश करेगी। सत्र में उच्च शिक्षा आयोग विधेयक भी प्रमुख रहेगा, जो उच्च शिक्षण संस्थानों को अधिक स्वायत्तता देने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
15 कार्य दिवस वाला यह सत्र 19 दिसंबर को समाप्त होगा।






