नई दिल्ली, 22 नवंबर, 2025 : भारत सरकार ने देश के करोड़ों कर्मचारियों, मजदूरों और पेशेवरों के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 21 नवंबर 2025 से चार नए लेबर कोड (Labour Codes) को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। सरकार का लक्ष्य इन आधुनिक कानूनों के जरिए नौकरी की सुरक्षा बढ़ाना, कर्मचारियों के अधिकारों को व्यापक बनाना और कार्यस्थल को सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाना है।
इन चार लेबर कोड्स में से एक—‘ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड–2020’ (OSH Code)—ने 13 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों को समाप्त कर दिया है। इससे श्रम कानूनों की व्यवस्था सरल और व्यवसाय के अनुकूल बन गई है।
कर्मचारियों के लिए क्या बदला?
- अनिवार्य अपॉइंटमेंट लेटर
अब हर कर्मचारी को कंपनी की ओर से औपचारिक अपॉइंटमेंट लेटर अनिवार्य रूप से दिया जाएगा। इसमें पद, वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सभी जानकारी शामिल होगी।
- पेड लीव के लिए 180 दिन की शर्त
पहले वर्ष में 240 दिन काम करने पर मिलने वाली पेड लीव अब 180 दिन काम करने पर ही उपलब्ध होगी।
- तय कार्य घंटे
किसी भी कर्मचारी से दिन में 8 घंटे या सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं कराया जा सकेगा। राज्यों को 4, 5 या 6 दिन की वर्क-वीक निर्धारित करने की अनुमति होगी।
- दोगुना ओवरटाइम
तय समय से अधिक काम करने पर कर्मचारियों को ओवरटाइम का दोगुना वेतन मिलेगा।
- प्रवासी मजदूरों का अधिकार
पहली बार प्रवासी मजदूरों की परिभाषा व्यापक की गई है। इनके लिए राष्ट्रीय डेटाबेस बनाया जा रहा है, जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जा सके।
सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए सख्त नियम
OSH Code के तहत सुरक्षा मानकों को सभी सेक्टर्स में लागू किया गया है:
* सभी कर्मचारियों का सालाना मुफ्त हेल्थ चेकअप अनिवार्य
* बड़ी फैक्ट्रियों, खदानों और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा समितियां
* राष्ट्रीय सुरक्षा बोर्ड का गठन
* असंगठित मजदूरों के लिए सोशल सिक्योरिटी फंड
* गंभीर हादसों में कोर्ट जुर्माने की 50% राशि पीड़ित या परिजनों को दे सकेगा
डिजिटल और मीडिया वर्कर्स को मान्यता
नए कोड्स में आधुनिक वर्कफोर्स को ध्यान में रखते हुए डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स, ऑडियो-विजुअल वर्कर्स, स्टंट परफॉर्मर, डबिंग आर्टिस्ट और डिजिटल मीडिया पत्रकारों को श्रम कानूनों के दायरे में शामिल किया गया है।
महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट अनुमति
महिलाएं अब किसी भी शिफ्ट में काम कर सकेंगी, जिसमें नाइट शिफ्ट भी शामिल है। इसके बदले कंपनियों को सुरक्षित परिवहन, कार्यस्थल सुविधाएं और सुरक्षा प्रोटोकॉल अनिवार्य रूप से लागू करने होंगे।
सरकार का कहना है कि 29 पुराने कानूनों को मिलाकर बनाए गए ये चार नए लेबर कोड भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और वर्कफोर्स को सशक्त बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होंगे।






